ओडिशा सरकार ने शुरू की लाल चंदन की नीलामी, पहले चरण में ही 7 करोड़ की कमाई
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'कुल 809.78 टन लाल चंदन, जिसे 'रक्त चंदन' के रूप में भी जाना जाता है, को ग्लोबल ई-टेंडर के साथ ई-नीलामी में रखा गया है।

चक्रवात तितली द्वारा 2018 में गिराए गए लाल चंदन की बिक्री से हुए भरपूर लाभ को देखते हुए ओडिशा सरकार ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, ओडिशा सरकार ने ग्लोबल ई-टेंडर के माध्यम से इस कीमती लकड़ी की ई-नीलामी शुरू कर दी है, जिसके पहले चरण में ही एक अंतरराष्ट्रीय बोली लगाने वाले से 7 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'कुल 809.78 टन लाल चंदन, जिसे 'रक्त चंदन' के रूप में भी जाना जाता है, को ग्लोबल ई-टेंडर के साथ ई-नीलामी में रखा गया है। लकड़ी की नीलामी 38 खेप में की जाएगी, जिनमें से दो खेप को 17 फरवरी को हुई ई-नीलामी के पहले चक्र में मंजूरी दी गई थी।'
साथ ही अधिकारियों ने बताया, '3 मार्च और 17 मार्च को ई-नीलामी के दो और चक्रों की योजना बनाई गई है। हालांकि, नीलामी चक्र नियमित अंतराल में तब तक जारी रहेगा, जब तक कि लकड़ी की पूरी खेप की बिक्री नहीं हो जाती। राज्य सरकार लकड़ी की वैश्विक बिक्री से लगभग 400 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, नीलामी में उम्मीद से ज्यादा कीमत मिल सकती है क्योंकि उच्च श्रेणी के लाल चंदन की कीमत कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1 करोड़ रुपये प्रति टन को पार कर जाती है।'
गौरतलब है कि परलाखेमुंडी वन प्रभाग में चक्रवात तितली में गिरे उच्च श्रेणी के लाल चंदन 100 साल से अधिक पुराने बताए जा रहे हैं। ये पेड़ 1912 में परलाखेमुंडी के तत्कालीन महाराजा द्वारा लगाए गए थे। इस लकड़ी का घनत्व भी देश में पाए जाने वाले अन्य लाल चंदन की तुलना में बहुत अधिक बताया जाता है।












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