ओडिशा सरकार का बड़ा कदम, ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए बनाए गए पांच वर्मी गांव
वन प्रभाग की तरफ से ओडिशा के क्योंझर में तारामकांत, बघिनासा, नलबिल्ला, अहरपोसी और रोहिणीडुमा को वर्मी गांव घोषित किया गया है।
ओडिशा में आजीविका के लिए ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता को कम करने और मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए, क्योंझर वन प्रभाग ने पांच वर्मी-गांव बनाए हैं जहां घरों को वर्मीकम्पोस्टिंग के माध्यम से वैकल्पिक आजीविका मिलेगी। वन प्रभाग द्वारा तारामकांत, बघिनासा, नलबिल्ला, अहरपोसी और रोहिणीडुमा को वर्मी गांव घोषित किया गया है।
क्योंझर के डीएफओ धमधेरे धनराज हनुमंत ने बताया, 'वर्मी-गांव हाल ही में विश्व पर्यावरण दिवस के उत्सव के हिस्से के रूप में बनाए गए हैं जिसमें प्रत्येक गांव आजीविका के वैकल्पिक स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन करेगा। वर्मीकम्पोस्ट एक वैकल्पिक आजीविका है जो मुख्य कृषि गतिविधियों को छोड़े बिना कम पूंजी निवेश के साथ की जा सकती है। यह किसानों और वन पर निर्भर जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने में प्रभावी है।'

धनराज हनुमंत ने आगे बताया, 'वर्मी-गांवो में कम से कम 50 प्रतिशत घरों में वर्मीकम्पोस्ट इकाइयां होंगी और वन सुरक्षा समितियों (वीएसएस) के तहत काम करने वाले मिशन शक्ति एसएचजी इसे क्रियान्वित करेंगे। संभाग को उम्मीद है कि जिले की जैविक खाद की आवश्यकता वर्मी गांवों से पूरी की जा सकेगी।'
इस संबंध में गांवों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए प्रभाग ने ग्रामीण उत्पाद एनजीओ और केवीके क्योंझर के साथ एक समझौता किया है। वन अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा, एक अन्य एजेंसी 'प्रकल्प' भी सूक्ष्म योजनाओं, आजीविका योजना और व्यवसाय योजना की तैयारी में गांवों की मदद कर रही है।












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