प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफेंट के विलय पर केंद्र के फैसले का इंतजार कर रहा है ओडिशा
सूत्रों के मुताबिक, एमओईएफसीसी के अधिकारियों ने कहा है कि एक ही आवास में बाघों और हाथियों दोनों की उपस्थिति के कारण कई क्षेत्रों में गतिविधियों की ओवरलैपिंग है।

चालू वित्त वर्ष में प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत फंड की कटौती से चिंतित ओडिशा सरकार, केंद्रीय बजट-2023 में दो योजनाओं के विलय पर नए फैसले के नतीजे का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
हालांकि वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत वार्षिक संचालन योजना (एपीओ) के मसौदे तैयार कर लिए हैं। सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने दोनों परियोजनाओं के तहत बजट आवंटन जमा करने के लिए अगले दौर की बैठक तक इंतजार करने को कहा है, जो इस महीने होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, एमओईएफसीसी के अधिकारियों ने कहा है कि एक ही आवास में बाघों और हाथियों दोनों की उपस्थिति के कारण कई क्षेत्रों में गतिविधियों की ओवरलैपिंग है। उन्होंने विभाग की वन्य प्राणी शाखा को अवगत करा दिया है कि बैठक के बाद राज्य को बजटीय आवंटन के लिए एपीओ जमा करने का नया प्रारूप जारी किया जाएगा। प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत राज्य के लिए केंद्रीय फंडिंग चिंता का विषय बनी हुई है।
सरकार ने 2022-23 वित्तीय वर्ष के लिए प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के लिए 21 करोड़ रुपये और सतकोसिया टाइगर रिजर्व के लिए 12 करोड़ रुपये और प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत 14 करोड़ रुपये का एपीओ जमा किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत सिमिलिपाल के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये और सतकोसिया के लिए 6-6 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।












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