दिल्ली में सुधरेगी मिड-डे मील की गुणवत्ता, आडिट को अनिवार्य करने की तैयारी

शिक्षा मंत्रालय इसे लेकर नए मिशन पर काम कर रहा है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले दोपहर के भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए सोशल आडिट अब अनिवार्य होगी।

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दिल्ली के स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता को लेकर अब सिर्फ शिकायतों से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए अभिभावकों व समाज के प्रबुद्ध लोगों को कुछ जिम्मेदारी भी उठानी होगी।

शिक्षा मंत्रालय इसे लेकर नए मिशन पर काम कर रहा है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले दोपहर के भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए सोशल आडिट अब अनिवार्य होगी। साथ ही सभी राज्यों को इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को अनिवार्य रूप से मुहैया करानी होगी।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वैसे तो पीएम पोषण स्कीम के तहत सोशल आडिट की व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन यह अभी अनिवार्य नहीं है। इसके चलते न तो स्कूल इस पर अमल करते हैं, न ही राज्यों की इसमें कोई रुचि होती है। नई पहल के तहत अब स्कूलों के मिड-डे मील की सोशल आडिट अनिवार्य होगी। यह व्यवस्था प्रत्येक जिले के करीब 20-20 स्कूलों से शुरू होगी। बाद में इससे जिले के सभी स्कूलों को जोड़ा जाएगा।

मंत्रालय का मानना है कि प्रत्येक स्कूल के भोजन की गुणवत्ता सरकारी स्तर पर नहीं जांची जा सकती है। ऐसे में यदि इसका जिम्मा अभिभावकों और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों को दे दिया जाए, तो वह इस पर बेहतर नजर रख सकेंगे। सोशल आडिट की व्यवस्था को अनिवार्य बनाने की तैयारी कर ली गई है। राज्यों के साथ होने वाली बैठकों में राज्यों को इससे अवगत कराया जाएगा।

राज्यों के साथ मंत्रालय की पीएम पोषण को लेकर बैठक 15 फरवरी से आठ अप्रैल तक प्रस्तावित है। गौरतलब है कि पीएम पोषण स्कीम के तहत इस समय देश के 11 लाख से ज्यादा स्कूलों में बालवाटिका से आठवीं तक पढ़ने वाले करीब बारह करोड़ बच्चों को दोपहर में भोजन मुहैया कराया जाता है।

ये होंगे सोशल आडिट टीम
शिक्षा मंत्रालय ने सोशल आडिट की जो योजना बनाई है, उसके तहत इस आडिट टीम में कोई बाहरी सदस्य नहीं होगा, बल्कि इस टीम में स्कूलों के आसपास गांवों में रहने वाले प्रबुद्ध लोग (जिसमें सेवानिवृत्त जज, अधिकारी, बैंक कर्मी आदि) शामिल होंगे। इसके अलावा ऐसे दो अभिभावक भी टीम में रहेंगे, जिनके बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते हैं। स्कूल के हेडमास्टर या प्रिंसिपल भी टीम में रहेंगे। टीम में आठ से 10 लोग होंगे।

जन चौपाल भी लगेगी
शिक्षा मंत्रालय दोपहर के भोजन के विषय पर प्रत्येक स्कूल में जन चौपाल के आयोजन की भी तैयारी कर रहा है। यह आयोजन महीने में एक बार होगा। इसमें सोशल आडिट टीम के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान कोई भी अभिभावक (जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं) भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

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