पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल का दावा, लोकसभा उपचुनाव में AAP को मिलेगी शानदार जीत

पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने दावा किया है कि लोकसभा उपचुनाव में AAP को शानदार जीत मिलेगी।

कुलदीप सिंह धालीवाल

पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने दावा किया है कि जालंधर में लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी अच्छे मार्जन से जीतेगी क्योंकि लोगों में पार्टी के 13 महीने के कार्यकाल को लेकर उत्साह है। इसके अलावा धालीवाल ने मजीठिया, बाजवा पर निशाना साधा तो वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर भी कुछ बातें सांझी की, पेश हैं उनसे की गई बातचीत के प्रमुख अंश:-

दोआबा इलाके को लेकर आपकी क्या सोच है?
दो चीजें हैं, जब तक ग्राऊंड जीरो पर हम नहीं जाते, तब तक कई चीजें नहीं देखते हैं। हम जब दोआबा में से निकलते हैं, हमें बड़े-बड़े मकान देखने को मिलते हैं, बाहर से देखने में लगता है कि दोआबा में जबरदस्त तरक्की की है। यह भी सच है कि दोआबा क्षेत्र में जितने भी घर, कम्युनिटी हाल, गुरुघर बनाने में एन.आर.आई. का अच्छा सहयोग रहा। मैं तो यह सोचता हूं कि सरकारें कहां थीं। गांवों में काम ही नहीं हुआ। जो समस्याएं फिरोजपुर या तरनतारन के बार्डर इलाकों में हैं, ऐसी ही समस्याएं दोआबा इलाके में हैं। कोई गली नहीं बनी हुई, विकास का नामोनिशान नहीं। मास्टर गुरबंता सिंह के एक गांव में मैं प्रचार के लिए गया तो पता लगा कि वहां सरकारी तौर पर एक ईंट तक नहीं लगी, जबकि उनके बेटे पंजाब में अच्छे पद पर रहे हैं।

मान सरकार की क्या उपलब्धियां रहीं?
बिजली के बिल नहीं आ रहे लोग, खुश हैं। प्रचार के दौरान कई लोग मिले, जिन्हें नौकरियां मिलीं। आदमपुर इलाके में मेरी डयूटी लगी थी। भोगपुर चीनी मिल का 30-35 करोड़ रुपया बकाया था, वह भी लोगों को मिल गया। इस बार जो गन्ना किसानों ने दिया, उसकी भी पेमैंट हो गई। मुझे लगता है कि लोग हमारे पक्ष में हैं और लोग आम आदमी पार्टी को ही सफल बनाएंगे। मैं जमीनी स्तर पर लोगों से जो बात करता हूं, तो मैं एक ही बात करता हूं कि हम पांच साल के लिए सबसे जुड़े हैं, कोई एक-दो महीने की बात नहीं है। हमने जो वादे किए हैं, वे पूरे कर रहे हैं। बिजली माफ की, रोजगार दिया, कच्चे मुलाजिमों को पक्का किया, टोल प्लाजा खत्म कर रहे हैं। हमें अभी सिर्फ 14 महीने का समय मिला है, अभी तो चार साल बाकी हैं।

लॉ एंड आर्डर पर विपक्ष आपको घेर रहा है?
जो पंजाब में ला एंड आर्डर की समस्या है, वह कोई नई नहीं है, बल्कि 1980 से यह समस्या चल रही है। कभी आतंकवाद आ गया, उस पर कंट्रोल हुआ तो कभी गैंगस्टर्स आ गए, कभी ड्रग्स का मुद्दा आ गया, ये सारे मुद्दे पुराने हैं।

बिक्रम मजीठिया कह रहे हैं क्या यही बदलाव था?
हां, बदलाव तो हो गया। बड़े बादल पांच बार मुख्यमंत्री रहे, वह धरती से चले गए। सुखबीर बादल, उनकी पत्नी तथा मजीठिया साहब वे लोग हैं, जिन्हें सोने की थाली में लगा हुआ खाना मिल गया। इनके बड़े बुजुर्गों ने इन्हें ये सब तोहफे में दिया। आज देख लो इनका हाल पूरे पंजाब में 3 सीटें रह गईं। लेकिन हम तो वे लोग हैं, जो साधारण घरों से बाहर निकले हैं या आए हैं। राज्य का मुख्यमंत्री भगवंत मान सिर्फ 7 किले जमीन का मालिक है। बदलाव की बातें करने वाले इन लोगों को यह समझ नहीं आया कि पंजाब के लोगों ने एक सामान्य से दिखने वाले तथा आम घर से निकले भगवंत मान पर विश्वास किया है। ये लोग चुनावों से पहले वीडियो चलाकर प्रचार ही करते रहे। मैं तो यह कहता हूं कि अकाली दल वाले खुद को देखें कि वह 70 सीटें लेने वाले कहां 3 सीटों पर आ गए। यह सब सुखबीर और मजीठिया के कारण ही हुआ है। मेरा दावा है कि अकाली दल अब खत्म है।

बाजवा कह रहे हैं कि कर्ज लेकर सरकार चला रहे हो?

मैं प्रताप सिंह बाजवा से पूछना चाहता हूं कि पिछली सरकार किसकी थी। शायद वह भूल गए हैं कि पहले कैप्टन अमरेंद्र सिंह तथा बाद में चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री थे। बाजवा साहब तब राज्यसभा के मैम्बर थे। लोकसभा के भी सदस्य रहे। मैं तो यह पूछता हूं कि पिछले पांच साल में पंजाब में काम क्या हुआ, वही बता दें। 1980-90 के दशक से यह कर्जा चल रहा है, तब किसकी सरकारें थीं। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बेअंत सिंह, कैप्टन अमरेंद्र सिंह, प्रकाश सिंह बादल की सरकारें ही चलती रहीं और यह कर्जा बाजवा जैसे लोगों के कारण ही पंजाब के सिर पर चढ़ा है, जबकि अब भगवंत मान सरकार तो कर्जा उतार रही है। कर्जे के तौर पर बिजली बोर्ड की अभी हाल ही में 20 हजार करोड़ की सबसिडी दी है। बाजवा साहब तो बातों में मास्टर हैं, पर हम काम की बात करते हैं।

सी.एम. कह रहे थे कि बाजवा मुख्यमंत्री की कुर्सी मांग रहे थे?
(हंसते हुए) यह तो कई कुछ मांग रहे थे। मुख्यमंत्री की सीट तो मांग ही रहे थे, अगर केजरीवाल साहब डिप्टी सी.एम. के लिए भी कहते तो वो भी मान जाते। चार साल तो अपने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के खिलाफ ही लड़ते रहे। लेकिन जब बटाला की सीट हासिल हो गई तो कैप्टन के खिलाफ बोलना भी बंद हो गया। उससे पहले सोनिया गांधी के आगे गुहार लगा लगाकर राजाशाही की बातें करते थे।

भाजपा इस बार ज्यादा एक्टिव है, क्या लगता है?
शहरों में पहले भी भाजपा एक्टिव रही है। लेकिन पंजाब गांवों में बसता है, गांवों में जब जाकर भाजपा वोट मांगेगी तब पता लगेगा। मुझे तो यह लगता है कि शहरी इलाकों में भाजपा को शायद कांग्रेस से भी ज्यादा वोटें मिल जातीं।

इस बार का चुनाव उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि दिग्गजों के बीच, आप क्या सोचते हो?
इन उम्मीदवारों ने अपनी कोशिश की है, लेकिन फालतू की बयानबाजी उम्मीदवारों के बीच में नहीं हुई। कांग्रेस के उम्मीदवार ने स्व. चौधरी साहब के नाम पर वोट मांगा है। अपनी पार्टी तक ही सीमित रहे। आम आदमी पार्टी, भाजपा तथा शिरोमणि अकाली दल इन सबके उम्मीदवार सुलझे हुए हैं और किसी ने भी फालतू की बयानबाजी करने में पूरी कोताही बरती। बड़े लीडर आपस में उलझते रहे। बिक्रम मजीठिया कई जगह सी.एम. को लेकर गलत बोले, वो चाहते थे कि हम भी गलत बोले, लेकिन हम मुद्दों पर ही रहे। हमने फालतू कोई बात ही नहीं की, सिर्फ अपनी उपलब्धियां लोगों को बताईं। जहां तक बाजवा की साहब की बात है तो उनसे आप वैसे भी उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वह तो मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए ही भागते रहे हैं। बादल, भट्ठल, बराड़, सिद्धू, बाजवा, चन्नी ये सब लोग पंजाब की राजनीति में दोबारा नहीं दिखेंगे। अभी आने वाले समय में राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने काम ही इतने कर देने हैं कि लोगों ने इन नेताओं को अपने गांव में घुसने नहीं देना।

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