ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- उत्सर्जन कम करने के लिए धातु क्षेत्र में नयी तकनीक की जरूरत

नई दिल्ली, 27 अगस्त: इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि धातु क्षेत्र में ऊर्जा की अत्यधिक खपत होती है, जो कार्बन उत्सर्जन का बड़ा कारण बनता है। इसलिए शून्य-उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस क्षेत्र में नयी तकनीक अपनाने की जरूरत है।

Jyotiraditya Scindia says need new technology in the metal sector to reduce emissions

विश्व स्तर पर कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लोहा और इस्पात उद्योग का लगभग आठ प्रतिशत हिस्सा है। भारत के कुल कार्बन उत्सर्जन में इस उद्योग का हिस्सा 12 प्रतिशत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज दुनिया में कुछ भी बेकार नहीं है और उपयुक्त तकनीक को अपनाकर सभी तरह के तथाकथित कचरे को संसाधनों में बदला जा सकता है।

सिंधिया ने संसधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था और संसाधन दक्षता पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि ज्यादातर प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं, और इसलिए इन संसाधनों का उपयोग करने के लिए पर्यावरणीय और आर्थिक रूप से व्यावहारिक तरीकों को खोजना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि देश में खनन और धातु, मोटर वाहन, बुनियादी ढांचा, परिवहन, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में बढ़त के कारण धातु उद्योग मजबूत वृद्धि के लिए तैयार है।

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