Jharkhand: मातृ सुरक्षा में झारखंड राष्ट्रीय औसत से बेहतर, केंद्रीय संयुक्त सचिव ने की तारीफ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत जननी एवं शिशु सुरक्षा को लेकर भारत सरकार द्वारा तय मानकों को झारखंड ने आठ वर्ष पहले ही पूरा कर लिया है। ना केवल लक्ष्य पूरा किया बल्कि राष्ट्रीय औसत से भी आगे निकल गया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत जननी एवं शिशु सुरक्षा को लेकर भारत सरकार द्वारा तय मानकों को झारखंड ने आठ वर्ष पहले ही पूरा कर लिया है। झारखंड ने मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर), शिशु मृत्यु दर (आईएमआर), नवजात मृत्युदर (एनएमआर) के मामले में सतत विकास लक्ष्य को न सिर्फ तय समय से पहले हासिल कर लिया है, बल्कि राष्ट्रीय औसत से भी आगे है।
केंद्रीय संयुक्त सचिव से मिली तारीफ
एसडीजी के तहत 2030 तक एमएमआर का राष्ट्रीय औसत 90 लाने का लक्ष्य है, जबकि झारखंड में यह औसत अभी ही 61 पहुंच चुका है। वर्तमान में एमएमआर का राष्ट्रीय औसत 112 है। यानी प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर राष्ट्रीय स्तर पर जहां 112 माताओं की मृत्यु हो जाती है, झारखंड में 61की मौत हो रही है। यही स्थिति नवजातों की मृत्यु का है। 2030 तक आईएमआर 26 पर लाना है जबकि, नेशनल आईएमआर 28 की तुलना में झारखंड का आईएमआर 25 है। राज्य की इस उपलब्धि पर केंद्रीय संयुक्त सचिव ने स्वास्थ्य अधिकारियों की सराहना भी की थी।
झारखंड में 100% महिलाओं का ANC
राष्ट्रीय स्तर पर फिलहाल महज 8 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का फुल एंटी नेटल चेकअप (एएनसी) हो पाती है, जबकि, झारखंड में शत प्रतिशत (102) महिलाओं का एएनसी हो रहा है। जबकि पोस्ट नेटल चेअप (प्रसव के 48 घंटे के अंदर) का राष्ट्रीय प्रतिशत जहां 44.4 है, राष्ट में 75 प्रतिशत महिलाओं की जांच प्रसव के 48 घंटे के अंदर पूरी हो चुकी है।
संस्थागत प्रसव में भी झारखंड अव्वल
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद जननी एवं शिशु सुरक्षा के अन्य मानकों के साथ साथ संस्थागत प्रसव में भी झारखंड राष्ट्रीय औसत से आगे निकल चुका है। वर्तमान में संस्थागत प्रसव का राष्ट्रीय प्रतिशत जहां 61.9 है, झारखंड का प्रतिशत 70 पहुंच चुका है। यानी 100 में 70 महिलाओं का प्रसव किसी ने किसी अस्पताल में हो रहा है। जबकि, एसडीजी के तहत 2030 तक इसे 95 लाने का लक्ष्य है।












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