हेमंत सरकार उठाने जा रही बड़ा कदम, झारखंड में ऐसे चुनावी सफर होगा आसान
रांची, 09 नवंबर- हेमंत सोरेन सरकार (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) ब सड़कों के माध्यम से अपने जनाधार को मजबूत करने की ओर कदम बढ़ा चुकी है। फोकस ग्रामीण और पिछड़े इलाकों पर है। खासकर उन इलाकों पर जहां वर्षों से सड
रांची, 09 नवंबर- हेमंत सोरेन सरकार (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) ब सड़कों के माध्यम से अपने जनाधार को मजबूत करने की ओर कदम बढ़ा चुकी है। फोकस ग्रामीण और पिछड़े इलाकों पर है। खासकर उन इलाकों पर जहां वर्षों से सड़कों का निर्माण नहीं हो सका है। यही कारण है कि सड़कों के निर्माण को लेकर राज्य सरकार संथाल परगना और कोल्हान प्रमंडल के ग्रामीण इलाकों पर फोकस कर रही है। ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन देखने को आ सकता है। इसके लिए स्वयं ग्रामीण विकास मंत्री लगातार परिश्रम कर रहे हैं।

सरकार को एशियन डेवलपमेंट बैंक से ऋण भी उपलब्ध
दूसरी ओर राज्य सरकार को इन इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (Asian Development Bank) से ऋण भी उपलब्ध हो चुका है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों से बाहर निकलते ही ग्रामीण इलाकों में सड़कें बदहाली का शिकार हैं और अब इन्हीं सड़कों की दशा सुधारकर राज्य सरकार चुनावी सफर पर निकलने की तैयारी में है। सरकार को प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार संताल परगना और कोल्हान प्रमंडल के ग्रामीण इलाकों में सड़कें कम हैं और खराब स्थिति में भी हैं। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) और कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक इन्हीं इलाकों में है और यही कारण है कि हेमंत सरकार इन सड़कों के माध्यम से चुनावी सफर को आसान बनाने की तैयारी में जुटी है।
मजबूत होंगी गांव की सड़कें, बदलेगा निर्माण का तरीका
अभियंता प्रमुख मुरारी भगत की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय दल ने बदलाव की पूरी योजना तैयार की है जिसमें ग्रामीण इलाकों की सड़कों को मजबूत करने के साथ-साथ निर्माण के तरीकों को भी बदलने का मसौदा तैयार किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के निर्देश पर ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए पैटर्न बदलने की पूरी तैयारी की गई है। इतना ही नहीं पहली बार होगा ग्रामीण इलाकों में भी सड़कों के लिए जमीन का अधिग्रहण होगा। इससे पूरी सड़क एक समान होगी। फिलहाल अधिग्रहण नहीं किया जाता है जिस कारण से सड़कें कहीं-कहीं आठ-नौ फीट चौड़ी ही रह जाती है।
इन माध्यमों से होगा बदलाव
जीएसबी तकनीक का होगा इस्तेमाल : ग्रेनुलर सब बेस या जीएसबी राजमार्ग निर्माण में अपनाई गई एक विशिष्ट परत है, जो सब ग्रेड के ऊपर और क्रस्ट सामग्री के नीचे रखी जाती है। जीएसबी के लिए प्राकृतिक रूप से उपलब्ध विभिन्न ग्रेड वाली सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। इससे सड़क की ऊपरी परत को पानी से सुरक्षा मिलती है।
डब्ल्यूएमएम पद्धति अपनाई जाएगी : सड़क निर्माण के लिए जब टूटे पत्थरों की मदद से आधार का निर्माण किया जाता है और सड़क की सतह नमी की मदद से पत्थर की धूल से बंधी होती है, तो सड़क निर्माण के उस विशेष रूप को वाटर बाउंड मैकडैम रोड कहा जाता है। यह सड़क निर्माण के समय सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली प्रक्रियाओं में से एक है। इससे सड़कों की क्षमता और मजबूती बढ़ती है।
बीएम सिस्टम का होगा प्रयोग : बिटुमिन मैकेडम- ग्रामीण सड़कों में इसको काम में लिया जाता है। इसमें बीएम की लेयर बिछाई जाती है और उस पर प्रीमिक्स कंक्रीट (पीएमसी) बिछाई जाती है। प्रयोग छोटी-मोटी सड़कों में किया जाता है।
ट्रैफिक सर्वे के आधार पर डिजाइन में बदलाव
बेहतरी राइडिंग क्वालिटी और टिकाऊ पथों के लिए न्यूनतम मात्राएं तय कर दी गई हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़कों के लिए 150 एमएम जीएसबी का लेयर होगा, 150 एमएम डब्ल्यूएमएम का लेयर होगा, 50 एमएम का बीएम लेयर होगा और 50 एमएम का बीसी लेयर होगा। इस प्रकार सड़कों की न्यूनतम मोटाई 40 सेंटीमीटर की होगी। इसके बावजूद सात दिनों के ट्रैफिक सर्वे के आधार पर भी डिजाइन में परिवर्तन किया जा सकता है।
अब गांव की सड़क भी पांच साल तक चलेगी
ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम (Jharkhand Rural Development Minister Alamgir Alam) का कहना है कि हमारा मकसद है कि ग्रामीण इलाकों में भी ऐसी सड़कें बनें जिसे पांच साल तक देखना ना पड़े। कम से कम 11 फीट की सड़कें होंगी और फ्लैंक के लिए जमीन का अधिग्रहण भी होगा। हम ग्रामीणों व किसानों को जमीन के बदले मुआवजा भी देंगे।












Click it and Unblock the Notifications