हरियाणा सरकार ने उठाए पराली को आय के स्रोत में बदलने के ठोस कदम
एक समय था जब हरियाणा में धान की पराली को पर्यावरणीय खतरे के रूप में देखा जाता था लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे किसानों की आय बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में बदलने का काम किया है।
सरकार ने पराली के सदुपयोग व सही प्रबंधन के लिए सामान्य निर्धारित दर (कॉमन डिटरमाइंड रेट) की घोषणा की है। इसके अंतर्गत धान की खेती में इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक और डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ धान की पराली के लिए 2500 रुपये प्रति मीट्रिक टन के कॉमन डिटरमाइंड रेट की घोषणा जैसे उपाय शामिल हैं।

इसके अलावा, हरियाणा ने पिछले वर्ष की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं को लगभग 40 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की है। इस तरह, ये प्रयास सतत कृषि पद्धतियों के साथ-साथ पर्यावरणीय चुनौतियों को कम करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने आज यह बात धान की पराली जलाने की घटनाओं से निपटने संबंधी एक बैठक में कही। बैठक में राज्य की कार्य योजना और तैयारियों की समीक्षा की गई। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष एम.एम. कुट्टी, पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी. राघवेंद्र राव और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक नरहरि बांगर उपस्थित थे। सभी उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस बैठक में शामिल हुए।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में शून्य कृषि अग्नि परिस्थिति के लक्ष्य को प्राप्त के लिए राज्य सरकार ने 2500 रुपए प्रति मीट्रिक टन एवं 20 प्रतिशत से कम नमी पर अतिरिक्त 500 रुपये प्रति मीट्रिक टन रुपये की सीडीआर अधिसूचित की है। इसके अलावा, हरियाणा किसानों को रुपए सहित वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
इन-सीटू/एक्स-सीटू तकनीक के लिए प्रति एकड़ 1000 रुपये। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत 7000 प्रति एकड़ और धान की खेती में डीएसआर तकनीक के लिए प्रति एकड़ 4000 रु निर्धारित है। इन पहलों का उद्देश्य राज्य में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए किसानों को उनकी आय अधिकतम करने में सहायता करना है।












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