GIS 2023 में अक्षय ऊर्जा में निवेश पर रहेगा फोकस, आंध्र प्रदेश सरकार ने भी की तैयारी
वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार निवेशकों को इस उभरते हुए क्षेत्र में निवेश करने के लिए लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 3 और 4 मार्च को होने वाले आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2023 में अक्षय ऊर्जा पर विशेष फोकस रहेगा और इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की जगन मोहन सरकार अक्षय ऊर्जा पर बड़ा दांव लगाने जा रही है।
वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार निवेशकों को इस उभरते हुए क्षेत्र में निवेश करने के लिए लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। राज्य में पहले से ही 9GW अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता है, जिसमें 4.3GW सौर ऊर्जा, 4.1GW पवन ऊर्जा, 444MW बायोमास, 106MW छोटे हाइड्रो, 36MW नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और 41MW औद्योगिक अपशिष्ट से बिजली संयंत्र शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री बुगना राजेंद्रनाथ ने बताया, 'वास्तव में अक्षय ऊर्जा पहले से ही राज्य में कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 36% है। सौर में 38GW और पवन में 44GW (100 मीटर हब ऊंचाई पर) स्थापित करने की क्षमता वाले अक्षय ऊर्जा केंद्रों के साथ, आंध्र प्रदेश अक्षय ऊर्जा में निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण और उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।'
बुगना राजेंद्रनाथ ने कहा, 'राज्य सरकार ने अक्षय ऊर्जा निर्यात परियोजना विकासकर्ताओं को 5 लाख एकड़ भूमि पट्टे पर देने की योजना पहले ही तैयार कर ली है। सौर, पवन और सौर-पवन हाइब्रिड बिजली परियोजनाओं की स्थापना के लिए राज्य पहले ही 17,800 मेगावाट की अनुमानित क्षमता वाली सात परियोजनाओं की सूची में शामिल हो चुका है। हम 4,230MW की क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण परियोजना के साथ आ रहे हैं, जिसमें 2,300MW सौर PV, 250MW पवन और 1,680MW पंप स्टोरेज हाइड्रो की 10GWh की भंडारण क्षमता शामिल है।'












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