किसान आंदोलन की बरसी पर 24 नवंबर को अंबाला में रेल रोकेंगे किसान

चंडीगढ़। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कृषि कानूनों के खिलाफ चलाए गए किसान आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ पर 24 नवंबर को अंबाला में रेल रोको कार्यक्रम चलाने का एलान किया है। चढ़ूनी ने कहा कि किसानों पर दर्ज मुकदमे अभी तक वापस नहीं हुए हैं। इसके विरोधस्वरूप 24 नवंबर को रेल यातायात बाधित किया जाएगा।

 Farmers will stop rail in Ambala on November 24 on the anniversary of the farmers movement

चढ़ूनी ने कहा कि 24 नवंबर को मोहड़ा अनाज मंडी में से किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस दिन दिन किसानों के मसीहा सर छोटू राम की जयंती मनाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जीएम फसलों के माध्यम से बीज पर कंपनियों का कब्जा करवाना चाहती है। किसान जीएम फसलों का विरोध जारी रखेंगे। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 13 महीने 13 दिन चले किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने लिखित में हुए समझौते अनुसार सभी प्रकार के केस वापस लेने किसानों की शर्त को माना था, परंतु लगभग एक साल का समय बीत जाने पर भी अभी तक रेलवे के केस वापस नही किए गए हैं।

चढ़ूनी ने कहा कि मीडिया प्रभारी राकेश कुमार बैंस द्वारा मांगी सूचना में रेलवे विभाग ने बताया कि हरियाणा में किसान आंदोलन के दौरान 12 केस दर्ज किए गए थे, लेकिन इस केसों को वापस लेने का कोई भी आदेश विभाग को नहीं मिला है।

इस प्रकार आंदोलन के दौरान हरियाणा सरकार से हुई मुख्यमंत्री से समझोता वार्ता में भी सभी केस वापस लेने की बात हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानी थी और सारे पुराने केस वापस लेने व आंदोलन के सहायक लोगो को किसी भी प्रकार से पीड़ित न करने का वादा किया था, जबकि कई के असला लाइसेंस व पासपोर्ट आदि का कार्य सरकार ने जानबूझ कर रोका हुआ है। चढ़ूनी ने कहा कि इसी प्रकार 30 मुकदमे पहले से आंदोलनों के पेंडिग हैं, जो कि सरकार को पहले से लिखित में भेजे जा चुके हैं। इन पर कोई कार्रवाई नही हुई है। अभी तक कई केस वापस नहीं लिए गए हैं।

चढ़ूनी ने कहा कि जीएम फसलों का वे पहले दिन से विरोध करते आ रहे हैं। इससे पूहले भी उन्होंने लगभग 15 वर्ष पूर्व भी मोनोसेंटो कंपनी द्वारा लुकछिप कर किए जा रहे धान की फसल व मक्का की फसल के ट्राइल को जलाया था। जीएम सरसों से किसानों का नहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों का लाभ होगा और यह बीटी काटन में भी साबित हो चुका है।

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