आंध्र प्रदेश में बिजली संकट की समस्या हुई दूर, बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर घटा
आंध्र प्रदेश में बार-बार बिजली कटौती संबंधी आम जनता की समस्या दूर हो गई है। ऊर्जा विभाग ने राहत भरी खबर सुनाई है। विभाग ने बताया प्रदेश की बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो गया है सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है।

ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि बिजली की मांग और आपूर्ति बराबर है और बिजली भी बाजार से खरीदी जा रही है।
अचानक से बढ़ गई थी बिजली की डिमांड
बिजली का भार कम करने के लिए कोई आधिकारिक बिजली कटौती नहीं की गई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने अनौपचारिक बिजली रुकावट की शिकायतें आई। अधिकारियों ने बताया कि अगस्त के अंत में बिजली की मांग साल के इस समय के दौरान 180 मिलियन यूनिट की सामान्य मांग की तुलना में प्रति दिन 240 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।
अगस्त में बढ़ गई थी घरेलू और कृषि दोनों क्षेत्रों में बिजली की मांग
अगस्त महीने में लंबे समय तक मौसम शुष्क होने के कारण दिन के तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के कारण बिजली की डिमांड बढ़ गई थी, खासकर अगस्त के आखिरी सप्ताह के दौरान, घरेलू और कृषि दोनों क्षेत्रों में बिजली की मांग बढ़ गई थी।
बिजली कटौती
किसान सिंचाई के लिए पानी खींचने के लिए बोरवेल और मोटरों पर निर्भर थे। जिस कारण राज्य में अकेले कृषि क्षेत्र में 60 मिलियन यूनिट बिजली की मांग में वृद्धि हुई। वहीं इसके बाद ऊर्जा विभाग ने आएपीईआरसी को लोड राहत उपायों के तौर पर बिजली कटौती की सिफारिश की।
जिसके बाद एपीईआरसी ने 5 सितंबर से उद्योगों को सीमित बिजली कटौती की अनुमति देने के आदेश जारी किए ताकि कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के बिजली सप्लाई की जा सके।












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