BRS एमएलसी कैंडिडेट्स को लेकर राज्यपाल के फैसले की निंदा, हरीश राव बोले- लोग सब देख रहे
बीआरएस एमएलसी कैंडिडेट्स के अयोग्य घोषित किए जाने पर मंत्री टी हरीश राव ने राज्य में राज्यपाल की भूमिका के बारे में चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र के सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के लोग सब कुछ देख रहे हैं।
तेलंगाना सरकार में मंत्री टी हरीश राव ने एमएलसी पद के बीआरएस उम्मीदवार दासोजू श्रवण और कुर्रा सत्यनारायण को नामित करने की राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिशों को अस्वीकार करने के राज्यपाल तमिलिसाई साउंडराजन के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने राज्यपाल के इस कदम को अपमानजनक बताया है।

मंत्री टी हरीश ने एक बयान में कहा कि दासोजू श्रवण और कुर्रा सत्यनारायण केवल बीआरएस से जुड़े होने के कारण अयोग्य घोषित किया गया है। न्होंने कहा कि श्रवण और सत्यनारायण जिस समाज से आतें हैं वो अब तक हाशिए पर रहने वाले वर्गों में शामिल है। लेकिन देश में सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में इस वर्ग का एक लंबा इतिहास रहा है। तेलंगाना के विकास में इस वर्ग ने एक अहम योगदान दिया है।
मंत्री टी हरीश ने कहा एमएलसी कैंडिडेट्स के चयन के मामले में राजनीतिक आड़े नहीं आनी चाहिए। उन्होंने गुलाम अली खटाना, महेश जठमलानी, सोनल मानसिंह, रामशखल और राकेश सिन्हा जैसे भाजपा नेताओं का उदाहरण दिया, जिन्हें भाजपा के साथ सक्रिय जुड़ाव के बावजूद राष्ट्रपति कोटे के तहत राज्यसभा के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। टी हरीश भाजपा शासित राज्यों और गैर-भाजपा राज्यों के साथ व्यवहार के बीच विसंगतियों का भी जिक्र किया। टी हरीश ने बताया कि ये पहला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी इसी तरह की नियुक्तियों की अनुमति दी गई है।












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