दूर होंगी धरनी पोर्टल की गड़बड़ियां, तेलंगाना सरकार ने लिया बड़ा फैसला
नई प्रणाली से भूमि की दाखिल-खारिज की समस्या काफी हद तक हल भी हुई, जो रजिस्ट्री के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक थी।

तेलंगाना में धरनी पोर्टल की गड़बड़ियों से प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने कदम आगे बढ़ाए हैं। दरअसल CCLA ने हितधारकों के साथ उनकी शिकायतों को सुनने के लिए बैठकें करने की घोषणा की है। गौरतलब है कि लगभग दो साल पहले, राज्य सरकार ने एक एकीकृत भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली 'धरणी पोर्टल' की शुरुआत की थी। इसका मकसद भूमि प्रशासन में मौजूदा मुद्दों को हल करना था।
हालांकि नई प्रणाली से भूमि की दाखिल-खारिज की समस्या काफी हद तक हल भी हुई, जो रजिस्ट्री के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक थी। लेकिन, इस दौरान प्रशासन की कुछ चूक भी सामने आईं, जो अब दीवानी और कानूनी विवादों का रूप ले रही हैं।
विकाराबाद जिले के सयप्पा के पास तीन एकड़ जमीन है, जो करीब 30 साल पहले राज्य सरकार ने उन्हें सौंपी थी। सयप्पा ने धरणी के लॉन्च होने तक टाइटल डीड और अन्य कानूनी अधिकारों को जारी रखा। धरणी के ऑनलाइन होने के बाद, पोर्टल ने सयप्पा के भूमि रिकॉर्ड के सामने कुछ अन्य नाम प्रदर्शित किए। बस तभी से सयप्पा एक जगह से दूसरी जगह चक्कर काट रहे हैं। सयप्पा के अलावा ऐसे कई उदाहरण हैं।
इसके बाद सौंपी गई भूमि, निषिद्ध भूमि, सदा बैनामा, उत्तराधिकार की पद्धति में परिवर्तन और अपडेशन की मांग करने वाले आवेदनों के साथ कई अन्य मुद्दे भूमि प्रशासन से जुड़े हर संभव मंच पर उठे। इसके बाद राज्य सरकार ने धरणी में तकनीकी मुद्दों को हल करने पर फोकस करने का फैसला लिया। सीसीएलए नवीन मित्तल ने जिला स्तर पर हितधारकों के साथ बैठकों की एक सीरीज आयोजित करके जमीनी स्तर पर मुद्दों का हल करने का फैसला लिया है।












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