हरियाणा के सहकारी चीनी मिल 5 जुलाई तक करेंगे गन्ना किसानों को बकाया राशि का भुगतान
चंडीगढ़, 30 जून। चीनी मिलों की बकाया राशि के भुगतान के संबंध में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने कहा कि सभी सहकारी चीनी मिलों की ओर से लगभग ₹314 करोड़ की बकाया राशि का भुगतान 5 जुलाई तक कर दिया जाएगा। इसी प्रकार, निजी मिलें भी बकाया राशि का भुगतान जल्द करेंगी।

गन्ना उत्पादक हरियाणा में सहकारी चीनी मिलों पर किसानों का 314 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसकी वजह से किसान परेशान हैं। उन्हें खरीफ सीजन में खेती के लिए पैसा चाहिए। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने कहा है कि सभी सहकारी चीनी मिलों की ओर से लगभग 314 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान 5 जुलाई तक कर दिया जाएगा। इसी प्रकार, निजी मिलें भी बकाया राशि का भुगतान किसानों को जल्द करेंगी। चीनी मिलों की बकाया राशि के भुगतान के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने यह आश्वासन दिया है। कौशल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिलों की ओर से गन्ना बकाया राशि का भुगतान निश्चित समय में हो जाना चाहिए।
बैठक में बताया गया कि नारायणगढ़ चीनी मिल लिमिटेड द्वारा 2021-22 सीजन के लिए किसानों को 172।69 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष 59।15 करोड़ रुपये का भुगतान भी जल्द किया जाएगा। यह भी बताया गया कि 2021-22 सीजन के लिए मई, 2022 तक सहकारी चीनी मिलों को 78।92 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। इसके अलावा, निजी मिलों को लगभग 57 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। किन निजी मिलों को मिली कितनी सब्सिडी चार निजी चीनी मिलों को राज्य सरकार ने सब्सिडी दी है। इनमें सरस्वती चीनी मिल यमुनानगर को 29।28 करोड़ रुपये, पिकाडली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड भादसों को 12।84 करोड़ रुपये, नारायाणगढ़ चीनी मिल को 8।60 करोड़ रुपये और असंध मिल को 6।39 करोड़ रुपये दिया जाना शामिल हैं।
बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसन प्रसाद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ। सुमिता मिश्रा, कृषि विभाग के महानिदेशक हरदीप सिंह एवं हरको बैंक के प्रबंध निदेशक राहुल उप्पल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। हरियाणा में किसानों को मिल रहा गन्ने का सबसे ज्यादा भाव बता दें कि नारायणगढ़ शुगर मिल पर बकाया को लेकर पिछले दिनों किसानों ने प्रदर्शन भी किया था। हरियाणा में 11 सहकारी चीनी मिल हैं। यहां गन्ने का भाव सबसे अधिक 362 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। सरकार इन चीनी मिलों का घाटा भी कम करने की कोशिश में जुटी हुई है। यहां की चीनी मिलों से चीनी के अलावा इथेनॉल भी निकाला जा रहा है, ताकि उनकी इनकम में इजाफा हो।












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