Indian ships stranded in Hormuz: पेट्रोल-डीजल, गैस पर बड़ा संकट! होर्मुज में अभी भी फंसे हैं भारत के 41 टैंकर
Indian ships stranded in Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
ताजा संकट की वजह से भारत आने वाले करीब 41 जहाज वहां फंस गए हैं, जिनमें कच्चा तेल, एलपीजी और खाद जैसे जरूरी सामान लदे हैं। अगर यह रास्ता जल्द नहीं खुला, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सामानों की कीमतों पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट का संकट?
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बहुत ही संकरा समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे ताजा संघर्ष और गोलीबारी की वजह से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। दोनों देशों की सेनाओं द्वारा की गई नाकेबंदी ने इस अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग को एक जंग के मैदान में बदल दिया है।
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भारत पर पड़ने वाला सीधा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत निर्भर है। वर्तमान में भारत आने वाले 40 से ज्यादा जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं। इनमें से 13 जहाजों पर भारत का झंडा लगा है। अधिकारियों ने प्राथमिकता के आधार पर 41 जहाजों की लिस्ट बनाई है जिन्हें जल्द निकालना जरूरी है। इनमें 18 टैंकरों में तेल और गैस है, जबकि 16 जहाजों में खेती के लिए जरूरी खाद है। इन जहाजों के रुकने से भारत में ईंधन की कमी हो सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
तनाव की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम का टूटना है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना ने उसके तेल टैंकरों और तटीय इलाकों पर हमला करके समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। ईरान का कहना है कि खाड़ी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ही अस्थिरता की असली जड़ है। दोनों देशों के बीच जारी इस रस्साकशी ने दुनिया भर की सप्लाई चेन को मुश्किल में डाल दिया है।
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महंगाई और अर्थव्यवस्था पर खतरा
अगर होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक जहाजों का रास्ता बंद रहा, तो इसका सबसे बड़ा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा। जब कच्चे तेल की सप्लाई कम होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ जाते हैं। इससे भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है। चूंकि इन जहाजों में खाद भी है, इसलिए इसका असर खेती और खाने-पीने की चीजों के दामों पर भी पड़ सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।












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