PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने में लाएं तेजी, सीएम योगी ने दिए आदेश
PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने में लाएं तेजी, सीएम योगी ने दिए आदेश
लखनऊ, 18 जून: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि एक जिला एक मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। ऐसे 16 जिले जहां पर सरकारी या प्राइवेट एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं है, वहां पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाए। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उनके जिले में ही मिले, इसके लिए पुख्ता इंजताम किए जाए।

प्रदेश के जिन 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिल कॉलेज बनाए जाने हैं उनमें महाराजगंज और संभल में निजी संस्था को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए मंजूरी दी गई है। बाकी 14 जिलों में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए 21 से अधिक आवेदन आए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद अब चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा बाकी जिले में मेडिकल कालेज बनाने के काम में तेजी लाएगा। महाराजगंज और संभल के अलावा जिन जिलों में पीपीपी माडल पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने हैं उनमें बागपत, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महोबा, मैनपुरी, मऊ, श्रावस्ती, रामपुर, संत कबीर नगर और शामली शामिल हैं।
निजी संस्थाओं के सामने सरकारी जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज बनाने, सरकारी जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनाने और निजी संस्था द्वारा खुद की जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनाने के विकल्प दिए गए हैं। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले मेडिकल कॉलेजों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को लाभ और सरकारी मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर एक निश्चित संख्या में गरीब रोगियों का नि:शुल्क इलाज की भी सुविधा होगी।
प्रदेश में 359 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का जल्द निर्माण किया जाएगा। इसमें 130 सीएचसी व 229 पीएचसी हैं। इन सीएचसी व पीएचसी के नए भवनों के साथ-साथ आधे-अधूरे पड़े भवनों को भी पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें इस पर जोर दिया जा रहा है।
उप्र में अभी 943 सीएचसी व 3649 पीएचसी हैं। प्रदेश की जनसंख्या के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में 1552 सीएचसी व 5177 पीएचसी होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। नए व अधूरे पड़े अस्पतालों के भवन बनने से लोगों को दूर-दराज क्षेत्र में उपचार के लिए नहीं जाना होगा और न ही प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए चक्कर लगाना होगा।












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