'पूंजीगत खर्च पर झूठ फैला रही है टीडीपी', सीएम जगन मोहन के विशेष सचिव ने आंकड़े जारी कर खोली पोल
आंध्र प्रदेश सरकार ने पूंजीगत खर्च को लेकर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि चंद्रबाबू नायडू की पार्टी इस मुद्दे पर केवल झूठ फैलाने में लगी है।
मुख्यमंत्री के विशेष सचिव दुव्वुरी कृष्णा ने कहा, 'टीडीपी सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान औसत पूंजीगत व्यय 15,277.80 करोड़ रुपये था। वहीं, वाईएसआरसीपी सरकार के पिछले चार वर्षों के दौरान ही औसत पूंजीगत व्यय 16,095.90 करोड़ रुपये है। अगर पिछली सरकार से तुलना करें तो इसमें 5.7 फीसदी का इजाफा है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।'

उन्होंने आगे कहा, 'पिछले दो वित्तीय वर्षों से भी ज्यादा समय तक दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर बुरा असर डालने वाली कोविड महामारी के प्रकोप से पैदा हुई बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद वाईएसआरसीपी सरकार ने पूंजीगत व्यय के मामले में टीडीपी सरकार से बेहतर प्रदर्शन किया।'
गौरतलब है कि किसी अर्थव्यवस्था का आंकलन, पूंजी निर्माण सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) के आधार पर किया जाता है। दुव्वुरी कृष्णा ने कहा, '2020-21 के दौरान जीएफसीएफ में 7.34 फीसदी की गिरावट आई, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई। इसके बावजूद, पिछली सरकार के प्रदर्शन की तुलना में वाईएसआरसीपी सरकार के तहत पूंजीगत व्यय में कोई कमी नहीं आई।'
आपको बता दें कि पूंजीगत व्यय के अलावा, राज्य के आर्थिक प्रदर्शन को मापने के लिए कई संकेतक अहम हैं। शुरुआती तौर पर यहां कुछ फैक्ट्स दिए गए हैं, जिनसे वाईएसआरसीपी सरकार के शासन और विकास के दृष्टिकोण को समझा जा सकता है।
1- आंध्र प्रदेश की मौजूदा सरकार ने पिछले शासन की तुलना में प्रमुख क्षेत्रों में बजटीय आवंटन को उल्लेखनीय महत्व देने पर ध्यान केंद्रित किया है। वाईएसआरसीपी सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में उच्च आवंटन के मामले में पिछली सरकार से बेहतर प्रदर्शन किया है।
2- स्वास्थ्य क्षेत्र में 114 फीसदी की वृद्धि हुई, जो एक मिसाल है। 2014-19 में स्वास्थ्य क्षेत्र में बजटीय आवंटन 31,000 करोड़ रुपये था, जो 2019-24 में बढ़कर 68,000 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, शिक्षा क्षेत्र में 52 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, ये 97,000 करोड़ रुपये से 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गई। . आंध्र प्रदेश के ग्रामीण विकास क्षेत्र में भी 23 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जो 77,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये हो गई।
विपक्ष ने दावा किया है कि राज्य सरकार ने 2022-23 के दौरान राज्य के बजट में पूंजीगत व्यय के लिए कुल आवंटन का केवल 23 फीसदी खर्च किया है। हालांकि, सीएम के विशेष सचिव दुव्वुरी कृष्णा का कहना है कि ये आंकड़े भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के प्रोविजनल अनुमान पर आधारित हैं।
दुव्वुरी कृष्णा ने आगे बताया, 'टीडीपी नेताओं ने उस वक्त भी कैग की ईमानदारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जब कैग ने बताया कि प्रोविजनल अनुमानों के आधार पर वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान राजकोषीय घाटे के आंकड़े ठीक स्थिति में हैं। आज वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पूंजीगत व्यय का यह आंकड़ा भी एक अस्थायी अनुमान ही है। लेकिन, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उन्हें फायदा मिल सकता है, तो टीडीपी और उनसे जुड़ा मीडिया इस रिपोर्ट का समर्थन कर रहे हैं।
अन्य आंकड़े, जो बताते हैं कि विकास के मामले में आगे है जगन मोहन सरकार
आंध्र प्रदेश ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 2022-23 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 16.22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। यानी 2021-22 में 11.33 करोड़ रुपये के जीएसडीपी के मुकाबले 2022-23 में 13.17 करोड़ रुपये के अनुमानित जीएसडीपी के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में कुल 1.83 लाख करोड़ रुपये जोड़े गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि आर्थिक विकास के मामले में राज्य अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
इसके अलावा, राज्य ने 2018-19 में 58,107 करोड़ रुपये से 2022-23 में कर राजस्व में 45 फीसदी की वृद्धि के साथ 84,389 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। राज्य प्रति व्यक्ति आय में भी अग्रणी है- जो 2022-23 में 26,931 रुपये बढ़कर 2,19,518 रुपये हो गई, जबकि 2021-22 में यह 1,92,587 रुपये थी। ये भी गौर करना चाहिए कि प्रति व्यक्ति आय में राज्य की वृद्धि अखिल भारतीय प्रति व्यक्ति आय की तुलना में अधिक है।
कृषि क्षेत्र वाईएसआरसीपी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य ने 2022-23 के दौरान कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में 4.54 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की। अकेले कृषि क्षेत्र में, विकास दर 10.72 फीसदी है, जो 2018-19 के दौरान -6.5% से कहीं अधिक है। ये वो वक्त था, जब राज्य में तेलुगु देशम पार्टी सत्ता में थी।
2022-23 के बजट में, सरकार ने 2021-22 के दौरान खर्च किए गए 27,993.93 करोड़ रुपये के मुकाबले कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 43,052.78 करोड़ रुपये आवंटित किए। ये सभी आंकड़े तेलुगु देशम पार्टी के लिए आंखें खोलने वाले हैं, जो पूंजीगत व्यय में कथित खराब प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार की आलोचना कर रही है।












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