मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा, धान से एथेनाल की अनुमति दे केंद्र तो सारा धान एमएसपी पर खरीद लें
रायपुर। कृषि उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) राष्ट्रीय मुद्दा बना हुआ है। नए कृषि कानून की वापसी केमुद्दे पर दिल्ली की सीमा पर करीब सालभर चले आंदोलन में एमएसपी की गारंटी किसानों की प्रमुख मांग रही। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कमेटी गठन की बात की है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि केंद्र सरकार का अडंगा समाप्त हो जाए तो राज्य सरकार किसानों का पूरा धान एमएसपी की गारंटी के साथ खरीदने को तैयार है।

उनका कहना है कि धान से एथेनाल (ईंधन) बनाने के लिए 12 प्लांट स्थापित करने के करार के बाद भी मामला केंद्र सरकार की अनुमति के लिए अटका हुआ है। सरकार के तीन वर्ष (17 दिसंबर) पूरे होने के मौके पर मुख्यमंत्री बघेल ने 'नईदुनिया के स्थानीय संपादक प्रभारी सतीश चंद्र श्रीवास्तव और स्टेट ब्यूरो प्रमुख संजीत कुमार के साथ विशेष बातचीत की। इस दौरान शराबबंदी और बेरोजगारी भत्ता जैसे अधूरे चुनावी वादों से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में उनकी बढ़ती धमक समेत अन्य विषयों पर खुलकर बात हुई।
उन्होंने राज्य सरकार केतीन वर्षों के कार्यकाल के साथ ही आगामी दो वर्षों की योजना पर भी बात की। बघेल का दावा है कि कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ी कला-संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान को जगाया है। सभी वर्ग के लोगों को लगता है कि यह हमारी सरकार है। इस विश्वास और भरोसे को कायम रखकर संपन्न्, शक्तिशाली और विकसित राज्य बनाना ही उनका लक्ष्य है।
बघेल ने कहा कि राज्य सरकार धान से एथेनाल (ईंधन) बनाने के लिए तैयार है। इसके लिए हम अब तक 12 एमओयू कर चुकेहैं, लेकिन केंद्र सरकार से अनुमति नहीं मिल रही है। एमएसपी की गारंटी की मांग करते हुए किसानों ने 14 महीने तक आंदोलन किया। यदि प्लांट लग जाएंगे तो स्वमेव एमएसपी की गारंटी मिल जाएगी। लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
यदि धान से एथेनाल बनाने के संयंत्र स्थापित होंगे तो सरकार भी किसानों का पूरा धान एमएसपी पर खरीदने की स्थिति में होगी। अभी केंद्रसरकार की एजेंसी के रूप में राज्य सरकार धान खरीदी करती है। केंद्र सरकार जितना चावल लेने की सहमति देती है उसके आधार पर खरीदी का लक्ष्य तय किया जाता है, उससे बहुत ज्यादा धान नहीं खरीद सकते। यही वजह से प्रति एकड़ सिर्फ 15 क्विंटल की दर से धान खरीदी की जाती है। यदि प्रदेश में एथेनाल संयंत्र स्थापित होंगे तो उन संयंत्रों को धान की आपूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जाएगी। तब हम किसानों से पूरा धान एमएसपी पर खरीदी कर सकेंगे।
इससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों पर खर्च हो रही विदेशी मुद्रा भी बचेगी। अभी केंद्र ने केवल गन्ना और मक्का से एथेनाल उत्पादन की अनुमति दी है। राज्य में पीपीपी माडल पर इसकेलिए संयंत्र लगाए गए जा रहे हैं। सालभर में उत्पादन भी शुरू होने की उम्मीद है।
यह है अगले दो साल की कार्ययोजना
बघेल ने कहा कि सबसे बड़ा काम फ्लैगशिप योजनाओं को पूरा करना है। चाहे वह नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी हो या गढ़बो नवा छत्तीसगढ़। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऐसा संपन्न्, शक्तिशाली और विकसित राज्य बनाना है, जिसमें आधोसंरचना का विकास हो तथा लोगों की आय बढ़े। भाईचारा और आपसी प्रेम हमारी पहचान है। लोगों में कहीं दुराग्रह नहीं है। यहां जातिभेद तो है लेकिन जातीय वैमनस्यता नहीं है। बेहतर समाज के लिए आगे बढ़ेंगे।
राज्य में औद्योगिक विकास
बघेल ने कहा नई उद्योग नीति केमाध्यम से उन जिलों में उद्योग की स्थापना को बढ़ावा दे रहे हैं, जहां अभी कोई कल-कारखाना नहीं है। जिस ब्लाक में कोई उद्योग नहीं है। वहां संयंत्र लगाने वालों को ज्यादा छूट दी जा रही है। बड़े उद्योगों के बदले ऐसे छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसकेलिए कम जमीन की जरूरत पड़े, क्योंकि हमारी शर्त है कि किसी आदिवासी को जमीन से बेदखल नहीं किया जाएगा। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास से पलायन भी रुकेगा और लोग अपने क्षेत्र में रहते हुए ही आर्थिक प्रगति हासिल कर सकेंगे। इससे उन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाओं का स्वत: विकास होगा।












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