समग्र भाषाओं को पाठ्यक्रम से हटाना चाहती है आंध्र प्रदेश सरकार, छात्र हुए परेशान
आंध्र प्रदेश सरकार राज्य में जल्द समग्र भाषाओं को पाठ्यक्रम से हटा सकती है, जिसके चलते छात्रा बहुत परेशान है। वर्तमान शिक्षा पैटर्न में पहली भाषा तेलगू समग्र विषयों को समाप्त करना चाहते हैं। प्रदेश सरकार के इस प्रयास ने छात्रों और निजी शैक्षणिक सांस्थानें की चिंता बढ़ गई है। वहीं निजी संस्थानों और शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने भी कहा वर्तमान शैक्षणिक प्रणाली में पाठ्यक्रम में अचानक से बदलाव छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

जानिए क्या है समग्र विषय
समग्र प्रथम भाषा विषय वो सब्जेक्ट हैं जहां छात्र एक भाषा को प्रमुख विषय के रूप में और दूसरी भाषा को गौण विषय के रूप में सीखते हैं। जैसे यदि कोई छात्र तेलुगु को समग्र विषय के रूप में चुनता है, तो संस्कृत गौण विषय होगा। इसी तरह उर्दू/हिंदी, उर्दू/फ़ारसी और उर्दू/अरबी कुछ अन्य समग्र भाषा विषय हैं, जिन्हें पाठ्क्रम से सरकार खत्म करना चाहती है।
नई व्यवस्था के अंतर्गत क्या किया जा रहा
समग्र विषय के मामले में एक प्रमुख विषय के रूप में तेलुगु को 70 अंक और संस्कृत को 30 अंकों का वेटेज मिलता है। सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार छात्र समग्र विषय में दोनों विषयों में से किसी एक विषय ही पढ़ेगे। जिसके लिए विषय के लिए कुल 100 अंक में उनका मूल्यांकन किया जाएगा।। इसके अतिरिक्त छात्रों को अब परीक्षाओं के दौरान संस्कृत प्रश्नों का उत्तर पूरी तरह से देवनागरी लिपि में देना होगा।
इसी शैक्षणिक से लागू किया जाएगा
सरकारी परीक्षा निदेशक डी देवानंद रेड्डी ने बताया कि ये प्रणाली चालू शैक्षणिक वर्ष से ही लागू की जाएगी। उन्होंने बताया इस साल से तेलुगु या संस्कृत की परीक्षा 100 अंकों के लिए आयोजित की जाएगी और जिन छात्रों ने संस्कृत का विकल्प चुना है, उन्हें देवनागरी लिपि में परीक्षा देनी होगी।












Click it and Unblock the Notifications