आंध्र प्रदेश सरकार ने 2.3 हजार एकड़ भूमि से हटाया प्रतिबंध, 2,650 से अधिक परिवारों को मिला लाभ
आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसी नेतृत्व वाली सरकार ने गुंटूर जिले में प्रतिबंधित भूमि को लेकर बड़ा कदम उठाया है। जिससे दशकों पुरानी समस्या का हल हो गया है। दरअसल, जगन सरकार के आदेश पर गुंटूर जिला प्रशासन ने जिले की 2,339.15 एकड़ प्रतिबंधित भूमि को नियमित कर दिया है। यह कदम राज्य मंत्रिमंडल द्वारा आंध्र प्रदेश सौंपी गई भूमि (स्थानांतरण का निषेध) अधिनियम, 1977 में संशोधन करने के निर्णय के बाद आया है। जिसके बाद 20 वर्षों से अधिक समय से सरकार द्वारा सौंपी गई भूमि पर कब्जेदारों को पूर्ण अधिकार प्राप्त हो गया है।
सीएम जगन की कैबिनेट के फैसले से आंध्र प्रदेश के 2,650 से अधिक परिवारों को लाभ मिला है। गुंटूर के लिए शासन के निर्देश पर अधिकारियों ने जांच के बाद 2,339 एकड़ भूमि को नियमित कर दिया है। जिसमें 601.36 एकड़ भूमि ऐसी है, जिसमें करीब 2,650 से अधिक परिवारों का मकान है। जिन्हें इस जमीन का मालिकाना हक मिल गया है।

पहले क्या थी समस्या?
दरअसल, आंध्र प्रदेश की भूमि अधिनियम, 1977 के अनुसार सरकार द्वारा किसी भूमिहीन गरीब को खेती के उद्देश्य से या घर बनाने के लिए आवंटित भूमि का कोई भी टुकड़ा हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं थी। ऐसे आवंटित भूमि का कोई अधिकार या स्वामित्व भी सरकार की ओर नहीं दिया गया था। ऐसे में आंध्र प्रदेश भूमि एवं इनाम भूमि अधिनियम की धारा 22-ए की निषिद्ध सूची से ऐसे जमीनों को हटाने के लिए जगन सरकार की कैबिनेट ने निर्णय लिया। जिसके बाद सर्वेक्षण में ये पाया गया कि गुंटूर जिले के 208 से अधिक गांवों में 5,415.79 एकड़ भूमि 22ए के तहत निषिद्ध भूमि सूची की सूची में दर्ज थी। जिसे किसी की हस्तांतरित नहीं किया जा सकता था।
ऐसी जमीनों की उपयोगिता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के निर्देशों के बाद अधिकारियों ने गहनता से जांच की और भूमि का वर्गीकरण किया गया। सरकार के निर्देश के तहत प्रतिबंधित 2,339 एकड़ भूमि को नियमित किया। इस जमीनों को उनके कब्जेदार को आवंटित करने के साथ सरकार ने भूमि विवरण की नवीनतम सूची जिले के सभी पंजीकरण कार्यालयों में उपलब्ध करा दी है।
गुंटूर में कब्जेदारों को मिला मालिकाना हक
जगन सरकार के नए कदम के तहत गुंटूर में प्रतिबंधित जमीन पर लाभार्थियों को पूर्ण अधिकार देने की कवायद की गई। जिसके तहत अब मूल लाभार्थियों की मृत्यु की स्थिति में उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को भी जमीन का पूरा अधिकार मिलेगा। यानी अब उनका सरकार द्वारा आवंटित की गई जमीनों पर पूर्ण अधिकार होगा।












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