Yashoda Jayanti 2026: यशोदा जयंती आज, क्या है शुभ मुहूर्त? करें इस चालीसा का पाठ तभी होगी पूजा पूरी
Yashoda Jayanti 2026: आज यशोदा जयंती है, यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा को समर्पित है। यशोदा मईया तो ममता और निस्वार्थ प्रेम की साक्षात् मूर्ति हैं। मान्यता है कि इसी दिन माता यशोदा का जन्म हुआ था। यह पर्व विशेष रूप से मातृत्व, प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।
आज के दिन उत्तर भारत में कई माएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत भी रखती हैं। यशोदा जयंती हर वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।कई स्थानों पर इसे नंदोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, मथुरा-वृदांवन में इस दिन कई धार्मिक उत्सव भी होते हैं।

माना जाता है कि यशोदा जयंती पर माता यशोदा की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है, बच्चों की उम्र लंबी होती है और उन्हें यश मिलता है। घर में प्रेम और सौहार्द बना रहता है और मातृ दोष और संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
यशोदा जंयती 2026 शुभ मुहूर्त (Yashoda Jayanti 2026 Shubh Muhurat)
- अमृत काल: शाम 7 बजकर 31 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक।
यशोदा जयंती पूजा विधि (Yashoda Jayanti 2026 Puja Vidhi)
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और इसके बाद घर के मंदिर में माता यशोदा और बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध करें। दीपक जलाकर फूल, अक्षत, रोली अर्पित करें।
माता यशोदा को सफेद मिठाई, माखन, मिश्री और दूध से बने व्यंजन अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ यशोदायै नमः' मंत्र का जाप करें। कृष्ण चालीसा का पाठ करें, अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa)
॥ दोहा ॥
- बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।
- अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
- जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।
- करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥
चौपाई
- जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥
- जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
- जय नट-नागर नाग नथैया।कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥
- पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।आओ दीनन कष्ट निवारो॥
- वंशी मधुर अधर धरी तेरी।होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥
- आओ हरि पुनि माखन चाखो।आज लाज भारत की राखो॥
- गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
- रंजित राजिव नयन विशाला।मोर मुकुट वैजयंती माला॥
- कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।कटि किंकणी काछन काछे॥
- नील जलज सुन्दर तनु सोहे।छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
- मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
- करि पय पान, पुतनहि तारयो।अका बका कागासुर मारयो॥
- मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥
- सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।मसूर धार वारि वर्षाई॥
- लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।गोवर्धन नखधारि बचायो॥
- लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
- दुष्ट कंस अति उधम मचायो।कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
- नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
- करि गोपिन संग रास विलासा।सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
- केतिक महा असुर संहारयो।कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
- मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
- महि से मृतक छहों सुत लायो।मातु देवकी शोक मिटायो॥
- भौमासुर मुर दैत्य संहारी।लाये षट दश सहसकुमारी॥
- दै भिन्हीं तृण चीर सहारा।जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
- असुर बकासुर आदिक मारयो।भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥
- दीन सुदामा के दुःख टारयो।तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
- प्रेम के साग विदुर घर मांगे।दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
- लखि प्रेम की महिमा भारी।ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
- भारत के पारथ रथ हांके।लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥
- निज गीता के ज्ञान सुनाये।भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥
- मीरा थी ऐसी मतवाली।विष पी गई बजाकर ताली॥
- राना भेजा सांप पिटारी।शालिग्राम बने बनवारी॥
- निज माया तुम विधिहिं दिखायो।उर ते संशय सकल मिटायो॥
- तब शत निन्दा करी तत्काला।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
- जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।दीनानाथ लाज अब जाई॥
- तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
- अस नाथ के नाथ कन्हैया।डूबत भंवर बचावत नैया॥
- सुन्दरदास आस उर धारी।दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
- नाथ सकल मम कुमति निवारो।क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
- खोलो पट अब दर्शन दीजै।बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
॥ दोहा ॥
- यह चालीसा कृष्ण का,पाठ करै उर धारि।
- अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,लहै पदारथ चारि॥












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