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भगवान वेंकेटश्वर बालाजी को ही क्यों किया जाता है बालों का दान, मंदिर से जुड़ी है कई रहस्य

TIRUPATI BALAJI: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित यह मंदिर भारत के सबसे धनवान मंदिर में से एक है। यहां हर साल श्रद्धालुओं के द्वारा करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। तिरुपति बालाजी भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां देश-विदेश के कोने से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं हैं।

यह मंदिर चित्तूर जिले के तिरुपति के पास तिरुमाला पहाड़ी पर स्थित है। जहां पर भगवान श्री हरि विष्णु की वेंकटेश्वर के रूप में पूजा होती है। इस मंदिर में भगवान बालाजी को दान में बाल देने की अनोखी मान्यता है, जानते हैं इसके पीछे का तथ्य और मंदिर से जुड़ी कुछ रहस्य मयी बातें।

TIRUPATI BALAJI SWAMI TEMPLE

तिरुपति बालाजी मंदिर में बालों का दान

हजारों साल पहले जब भगवान विष्णु वेंकटेश्वर रूप में धरती पर आए थें। तब वह चीटियों के बिल में ध्यान किया करते थें। उसी बिल के ऊपर एक गाय रोज आकर दूध दिया करती थीं। उसी दूध को वेंकटेश्वर बालाजी ग्रहण कर लेते थें। एक दिन उस गाय के मालिक ने उसे ऐसा करते देख लिया और मलिक क्रोध में आकर अपनी कुल्हाड़ी उठाकर गाय पर प्रहार करने लगे।

यह देख वेंकटेश्वर भगवान बालाजी बीच में आ गए और वह कुल्हाड़ी गाय की जगह भगवान वेंकटेश्वर को आ लगीं। जिससे उनके सर के आगे के कुछ बाल कट गए और उन्हें गहरी चोट आ गयी। जब बालाजी की माता ने उन्हें ऐसा देखा, तो जहां से उनके बाल कट गए थे वहां उन्होंने अपने बाल उखाड़ कर लगा दियें और वापस से भगवान वेंकटेश्वर वैसे दिखने लगें।

तब भगवान वेंकटेश्वर प्रसन्न होकर अपनी माता से कहा बाल तो हर किसी की सुंदरता को बढ़ाता हैं, और ऐसे में आपने मुझे अपने बालों का दान किया है। तो आज के बाद कोई भी भक्त मेरे लिए अपने बालों का दान करेगा तो मैं उसकी सारी इच्छाएं और समस्याओं का समाधान करूंगा। उनकी इच्छाओं को पूरी करूंगा तब से लेकर आज तक तिरुपति बालाजी मंदिर में अपने बालों का दान करने की प्रथा चली आ रही है।

दान किया हुआ बालों का क्या किया जाता है

अब इतना सब कुछ जानने के बाद हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर दान किए गए बालों का होता क्या होगा। आपको बता दें, दुनियाभर के कोने से आने वाले भक्तों के द्वारा हर साल लगभग 500 से 600 टन बाल तिरुपति मंदिर में दान किए जाते हैं। दान किए गए बालों को एक प्रक्रिया के द्वारा साफ स्वच्छ किया जाता है, उसके बाद इन बालों को उबाला जाता है, धोया जाता है, फिर सुखाया जाता है और सही तापमान में रखा जाता है। वेबसाइट के द्वारा इन बालों को ऑनलाइन बेचा जाता है। बालों की ऑनलाइन नीलामी तिरुमाला तिरुपति देवस्थान द्वारा आयोजित की जाती है। दान किए गए बालों की ऑनलाइन नीलामी से करोड़ों रुपए का मुनाफा होता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर के कुछ रहस्य

- 1979 में नवंबर के महीने तक तिरुपति क्षेत्र में भयंकर आकाल पड़ गया था। मौसम विभाग ने भी साफ कर दिया था, कि वर्ष की कोई भी उम्मीद नहीं है। अब मंदिर ट्रस्ट के सामने मंदिर बंद करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं था। उसी समय अखबारों में सिर्फ एक ही बात छपती थी, जो भगवान अपने भक्तों के लिए बारिश नहीं कर सकता वह किस बात का भगवान है।

लेकिन काफी सोचने और तिरुपति मंदिर ट्रस्ट के सलाहकार गणपति शास्त्री महाराज के सलाह पर ट्रस्ट कारों ने वरुण जाप करने का निर्णय लिया और सभी इसी इंतजार में थे कि भगवान उन्हें ऐसा करने की स्वीकृति दे दे। 7 नवंबर 1979 को आधी रात को तिरुपति बालाजी मंदिर से जोर-जोर से घटियों की आवाज आने लगी सभी भक्त यह समझ गए, कि यह प्रभु द्वारा एक संकेती है इसके बाद वरुण जाप संपन्न करते ही पूरे तिरुपति क्षेत्र में वर्ष शुरू हो गई।

- तिरुपति बालाजी में जो भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति है विराजमान है उनके सर पर लगे बाल असली है बिल्कुल एक इंसान की तरह। मूर्ति पर लगे बाल कभी उलझते नहीं है।

- भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर आप कान लगाकर सुनेंगे तो आपको समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देगी। वैसे तो गर्भ ग्रह में पुजारी और VIP लोगों को ही अंदर जाने की अनुभूति होती है।

- भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति के पास एक दिया हमेशा जलता रहता है जिसमें ना कोई तेल और ना घी , बाती डाला जाता है और ना ही कोई ऐसा विद्युत डाला जाता है जिससे दिया हमेशा चलता रहे यह एक रहस्यमयी बातें हैं, जिसे आज तक कोई वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाया है।

- हर गुरुवार को भगवान वेंकटेश्वर बालाजी को चंदन का लेप लगाया जाता है जब चंदन का लेप लगाया जाता है और उस लेप को हटाया जाता है, तब हृदय भगवान वेंकटेश्वर पर लगे चंदन में मां लक्ष्मी की छवि उभर आती हैं। कहते है भगवान वेंकटेश्वर के हदय में मां लक्ष्मी विराजमान होती हैं।

- मंदिर के वातावरण को काफी ठंडा रखा जाता है, इसके बावजूद भी भगवान वेंकटेश्वर को गर्मी लगती है और भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर पसीना आता है। उनके पीठ इंसानों की तरह नरम होता हैं।

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