Tilak or Bindi: क्यों लगाते हैं माथे पर तिलक? क्या है बिंदिया लगाने का अर्थ?
Tilak applied on the forehead?: जिस तरह से साइंस हर चीज के पीछे साक्ष्य प्रस्तुत करता है, ठीक उसी तरह से धर्म भले ही प्रमाण पेश ना करें लेकिन वजह जरूर स्पष्ट कर देता है इसलिए धार्मिक रूप से जितनी भी चीजों के नियम-कानून होते हैं उसके पीछे बड़ा कारण होता है। अब आप लोग जब मंदिर जाते हैं या फिर कोई पर्व होता है तो माथे पर तिलक लगता है। कभी आपने सोचा है कि आखिर इसके पीछे कारण क्या है? नहीं तो चलिए आपको बताते हैं, दरअसल तिलक हमेशा भौंहों के बीच में लगता है जहां पर आज्ञा चक्र होता है, जिसको हमेशा सक्रिय रखने के लिए वहां पर तिलक लगाया जाता है।

आपने अक्सर देखा होगा कि पंडित लोग अक्सर चंदन का तिलक लगाते हैं क्योंकि चंदन की प्रवृत्ति ठंडी होती है। इंसान को हमेशा धैर्यशाली और शांत रखने के लिए आज्ञाचक्र पर चंदन का टीका लगाया जाता है। यही नहीं आज्ञा चक्र के दाईं ओर अजिमा नाड़ी और बायीं ओर वर्णा नाड़ी होती है जो किं चंदन के कारण हमेशा सक्रिय रहती है। अक्सर एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ भी इन्हीं नाड़ियों को दबाने के लिए कहते हैं, जिससे आपकी थकान कम हो। आज्ञाचक्र एक तरह से Pineal Gland हैं।

वैसे टीका चंदन का नहीं बल्कि रोली, कुमकुम या हल्दी का भी लगता है, जो कि शुभता के साथ-साथ ऊर्जा-खुशी का भी प्रतीक है इसलिए घर के शुभ काम या पर्व पर इन चीजों से तिलक या टीका लगाया जाता है। मान्यता ये भी है कि तिलक लगाना या टीका लगाना इंसान को सम्मान देना होता है इसलिए भी भारतीय संस्कृति में टीके या तिलक का चलन है।

जहां पुरुष लोग माथे पर टीका लगाते हैं, वहीं हिंदू विवाहित महिलाएं माथे पर बिंदी लगाती हैं। इसके पीछे भी कारण महिलाओं को चित्त को प्रसन्न, शांत और एक्टिव रखना होता है। मालूम हो कि आज्ञा चक्र को भौंह चक्र या तीसरा नेत्र चक्र या बुद्धि का नेत्र भी माना जाता हैं। बिंदी लगाने से इस एरिया को हल्का प्रेशर मिलता है जो कि महिलाओं की आंतरिक शक्तियों को बढ़ाता है। इसलिए कहा जाता है कि महिलाएं आंतरिक रूप से पुरुषों से ज्यादा बलवान होती हैं। बिंदी लगाने से महिलाएं सुंदर तो लगती ही हैं, साथ ही वो धैर्यशाली और ऊर्जावान बनी रहती हैं, जो कि घर-परिवार का ध्यान रखने वाली हर एक महिला के लिए काफी जरूरी है।












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