Nag Panchami 2019: जानिए नाग को क्यों पिलाया जाता है दूध?
नई दिल्ली। श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है, इस दिन सर्प जैसे विषैले जीव को हमारे यहां दूध पिलाने की परंपरा है, लेकिन इस प्रथा के पीछे एक गहरा संदेश छुपा हुआ है, दरअसल ऐसा माना गया है कि अगर अगर शत्रु का स्वागत स्वादिष्ट भोजन से किया जाए तो वो काफी हद तक उसका गुस्सा नियंत्रित हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन घरों की देहली पर कटोरी में दूध रखा जाता है।

नाग पूजन से होगी परिवार की रक्षा
दरअसल जितने भी जहरीले जीव होते हैं उनके लिए दूध विष के समान है। यदि वे दूध ग्रहण करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जायेगी। इसी प्रकार यदि कोई सर्प दूध ग्रहण कर लेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी इसलिए इस परंपरा को बनाया गया है, वैसे हमारे यहां तो कण-कण में प्रभु का वास माना जाता है, इसलिए इस दूध के जरिए हम सांप देवता से प्रार्थना करते हैं कि वो अपने घरों में जाएं और हमें नुकसान ना पहुंचाए।

कालसर्प दोष से मुक्ति
ऐसा भी माना जाता है कि कालसर्प दोष अगर दूर करना है तो सांप को दूध पिलाना चाहिए ऐसा करने से राहु-केतु का असर खत्म हो जाएगा और इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।

नागपंचमी पूजन विधि
- घर की साफ-सफाई करके नित्यकर्म से निवृत होकर स्नान ध्यान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
- पूजन के लिए सेंवई व चावल का भोजन बनायें।
- कुछ भागों में नागपंचमी से एक दिन पहले भोजन बनाकर रख लिया जाता है और उसी भोजन को नागपंचमी के दिन सेंवन किया जाता है।
- इसके बाद दीवार पर गेरू से पोतकर पूजन का स्थान बनायें।
- तत्पश्चात कच्चे दूध में कोयला घिस कर गेरू पुती दीवार पर घर बनायें जिसमें अनेक नागदेवताओं की आकृति बनातें है।
- कुछ जगहों पर सोने, चॉदी व लकड़ी की कलम से हल्दी व चन्दन की स्याही से मुख्य दरवाजे के दोनों साइड में पॉच-2 फनों वाले नागदेवता के चित्र बनाते है।
- सर्वप्रथम नागों की बॉबी में एक कटोरी दूध चढ़ाते है उसके बाद दीवार पर बने नागदेवताओं की दही, दूर्वा, चावल, दूर्वा, सेमई व सुगन्धित पुष्प से पूजन करते हैं।












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