Bakrid 2023: बकरीद का चांदी के दाम से क्‍या है खास कनेक्‍शन? जानें किन्‍हें जरूर करनी चाहिए 'कुर्बानी'

इस्‍लामिक कलेंडर के हिसाब से इस बार बकरीद 29 जून गुरूवार को मनाई जाएगी। बकरीद का त्‍यौाहर माह-ए-जिलहिज्‍ज का चांद दिखने के दस दिन बाद मनाया जाता है।

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बकरीद के मौके पर बकरे की कुर्बानी की जाती है। बकरीद पर बकरे की कुर्बानी का चांदी से खास कनेक्‍शन है इसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे ।

इस्‍लाम के पांच स्‍तंभ में है ये शामिल

बता दें इस्‍लाम धर्म में पांच स्‍तंभ होते हैं, जिसमें नमाज़ रोजा, जक़ात,तौहीद और हज शामिल है इसमें से तौहीद और नमाज़ मुसमलानों के लिए जरूरी है और बाकी रोज़ा, जक़ात और हज को पालन करने के लिए कुछ नियम बनाए गए है। जिसमें से बकरीद पर कुर्बानी करना इन्‍हीं पांच स्‍तभ मं शामिल है और इस कुर्बानी का चांदी से क्‍या कनेक्‍शन है आइए अब जानते हैं

चांदी से क्‍या है 'कुर्बानी' का कलेक्‍शन

दरअसल, इस्‍लाम के अनुसार जितनी व्‍यक्ति के पास चांदी होती है या उसके पास उसके बराबर रकम है तो बकरीद के दिन उसे कुर्बानी करना जरूरी होती है। वर्षों से मुस्लिम समाज इसको मानता आ रहा है।

'कुर्बानी' पर धन खर्च करना होता है जरूरी

मान लीजिए अगर किसी व्‍यक्ति के पास 44 तोला चांदी है या उसके पास उसके बराबर रकम है तो बकरीद पर उसे कुर्बानी करनी जरूरी होती है। सीधे तौर समझ जाइए कि जो धन हम मुनाफे के तौर पर कमाते हैं तो उसका कुछ हिस्‍सा बकरीद पर कुर्बानी के लिए खर्च करना जरूरी होता है।

कर्ज लेकर 'कुर्बानी' की इस्‍लाम में इज़ाजत नहीं है

ये भी कहा गया है कि अगर कुबार्नी करने के लिए रकम नहीं है तो कर्ज लेकर कुर्बानी नहीं करनी चाहिए। इसीलिए किसी भी व्‍यक्ति की संपन्‍ना को आंकने के लिए 52.5 तोला चांदी या उसके बराबर की रकम होने का नियम बनाया गया है।

कौन कर सकता है 'कुर्बानी'

इस्‍लाम के जानकारों के अनुसार अगर किसी व्‍यक्ति के पास 52.5 तोला 525 ग्राम चांदी है तो उसे बकरीद पर उसे कुर्बानी करनी जरूरी होती है।

जानें क्‍यों बकरीद पर की जाती है कुर्बानी

ईद उल अजहा यानी बकरीर पर कुर्बानी दी जाती है। शरीयत के मुताबिक अगर कुर्बानी देने के काबिल होने के बावजूद कुर्बानी जो बकरीद के दिन नहीं करता है वो गुनहगार बनता है। बकरीद पर कुर्बानी एक ऐसा जरियाहै जिससे इंसान अल्‍लाह की रजा हासिल करता है। अल्‍लाह अपने बंदों की नियत देखता है। अल्‍लाह अपने उन बंदों से खुश होता है। अल्‍लाह खुश होते हैं उनके बंदे उनकी दिखाई राह पर चलते हैं और अपनी मेहनत से कमाए धन को खर्च करे।

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