Budha Amarnath Yatra : क्या है बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का महत्व, कौन हैं बाबा चट्टानी?

Budha Amarnath Yatra: शुक्रवार सुबह बूढ़ा या बुड्ढा अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था जम्मू कश्मीर से रवाना किया गया है, आपको बता दें कि सावन मास में होने वाली ये यात्रा आज से शुरू होकर 27 अगस्त तक चलेगी। कहते हैं कि अमरनाथ यात्रा तब तक अधूरी है, जब तक कि आप बूढ़ा अमरनाथ का दर्शन ना कर लें, ये मंदिर बहुत सारी बातों की वजह से दूसरे मंदिरों से अलग है। आपको बता दें कि इस मंदिर का शिवलिंग भी बर्फ का बना हुआ है, जिसे कि 'बाबा चट्टानी' भी कहते हैं।

Budha Amarnath Yatra

मान्यता है कि भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था लेकिन इसकी शुरुआत बूढ़ा अमरनाथ मंदिर से हुई थी। आस्था के मानक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता है, भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को कुछ ना कुछ देते ही हैं, कहते हैं कि यहां पर मांगी गई हर मुराद जरूर पूरी होती है।

सांप्रदायिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण

आपको बता दें कि जम्मू से 246 किमी दूरी पर स्थित पुंछ घाटी के राजपुरा मंडी में स्थित इस मंदिर में लकड़ी की खूबसूरत नक्काशी की गई है। पुल्सता नदी के किनारे स्थित ये मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द का सबसे बड़ा और उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि इस मंदिर की रक्षा और देखभाल हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम भाई करते हैं क्योंकि इस एरिया में एक भी हिंदू परिवार नहीं हैं।

अब पाकिस्तानियों का आना नगण्य हो गया है

इस मंदिर का रखरखाव अव्वल दर्जे का है, पहले यहां पाकिस्तान के भी हिंदू परिवार के लोग मत्था टेकने आते थे लेकिन अब जब इंडिया-पाकिस्तान के रिश्ते अच्छे नहीं है तो यहां पर अब पाकिस्तानियों का आना नगण्य हो गया है।

लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है

माना जाता है कि चकमक पत्थर से सृजित शिवलिंग का दर्शन करने पर लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पीर पंजाल की खूबसूरत वादियों में बसे इस मंदिर पर रक्षाबंधन यानी कि श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बड़ा मेला लगता है।

बजरंग दल भी इस यात्रा के प्रबंधन में शामिल

वैसे तो बूढ़ा अमरनाथ की यात्रा का पूरा इंतजाम प्रशासन की ओर से किया जाता है लेकिन साल 2005 से बजरंग दल भी इस यात्रा के प्रबंधन में शामिल हो गया है।

'बाबा चट्टानी' का दर्शन

आपको बता दें कि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा , बाबा अमरनाथ की यात्रा की तरह दुर्लभ और कठिन नहीं है, यहां बड़े आराम से आया जाया जा सकता है इसलिए जो लोग बीमार हैं, बुजुर्ग हैं और बाबा भोलेनाथ के भक्त हैं लेकिन 'बाबा बर्फानी' तक नहीं पहुंच सकते हैं , वो यहां 'बाबा चट्टानी' का दर्शन करते हैं, जो 'बर्फानी' की ही तरह ही उन्हें यश, बल और मोक्ष प्रदान करते हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

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