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Vat Savitri Vrat 2023: क्या है सावित्री का अर्थ? क्यों होती है वट वृक्ष की पूजा?

Vat Savitri Vrat 2023: आज के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।

Vat Savitri Vrat 2023

Vat Savitri Vrat 2023: ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वटसावित्री व्रत किया जाता है। अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाने वाला ये व्रत प्रेम और तपस्या का मानक है। ये व्रत प्रमाण है एक सुहागिन स्त्री के विश्वास का, ये उपवास उदाहरण है एक पत्नी के प्रेंम और हिम्मत का, इसलिए आज के दिन सभी विवाहित महिलाएं सावित्री और सत्यवान की पूजा वट वृक्ष के नीचे करती है। क्या आप जानते हैं कि आखिर सावित्री का मतलब क्या है, नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं।

क्या है सावित्री का अर्थ?

दरअसल सावित्री शब्द में गायत्री और सरस्वती मां दोनों ही समाहित हैं और यानी कि माता सावित्री के अंदर दोनों देवियों के गुण विद्यमान थे इसलिए तो वो साक्षात देवी ही कहलाईं जिन्होंने यमराज को भी उनके पति के प्राण वापस करने के लिए विवश कर दिया था।

कौन थीं सावित्री?

आपको बता दें कि भद्र देश के राजा अश्वपति निसंतान थे, 18 वर्षों तक लगातार जप-तप करने के बाद उन्हें सावित्रीदेवी ने साक्षात दर्शन दिए थे और उन्हें वरदान दिया था कि उनके घर देवी स्वरूप कन्या का जन्म होगा। मां के इस वरदान के बाद ही राजन के घर में एक बेटी ने जन्म लिया, जिनका नाम राजा अश्वपति ने ही सावित्री रख दिया। वो कन्या बहुत होशियार थी। जब वो बड़ी हुई तो उनका विवाह सत्यवान जैसे एक अच्छे और सच्चे व्यक्ति से कर दिया गया लेकिन वो अल्पआयु था, शादी के एक साल बाद ही उसकी मौत निश्चित थी, सावित्री को ये बात जब पता चली तो बिल्कुल भी घबराई नहीं।

सावित्री ने यमराज से मांगा वरदान

जब मृत्यु का दिन निकट आया तो वो अपपने पति के साथ वन को चली गईं, जैसे ही वो जंगल में पहुंचीं तो उनके पति के सिर में अचानक दर्द हुआ। वो बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री के गोद में लेट गए। थोड़ी देर बाद सावित्री ने देखा सामने यमराज खड़े हैं और वो सत्यवान को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार हैं और जब वो जाने लगे तो सावित्री भी पीछे-पीछे उनके चलने लगीं, इस पर यमराज ने कहा बेटी तुम लौट जाओ, अब कुछ नहीं हो सकता है। लेकिन सावित्री रोते हुए उनके पीछे चलती रहीं, यमराज उसकी निष्ठा देखकर एकदम से पिघल गए, इस पर उन्होंने कहा कि 'बेटी तुम एक तपस्वी हो, बताओ क्या वरदान चाहिए।' इस पर सावित्री ने कहा 'मैं सत्यवान के 100 पुत्रों की मां बनना चाहती हूं'। इस पर यमराज ने कहा 'तथास्तु।'

सावित्री की चतुराई पर यमराज हुए प्रसन्न

लेकिन इसके बाद सावित्री ने कहा कि 'आपका वरदान सत्यवान के बिना कैसे फलित हो सकता है।' यमराज सावित्री की चतुराई से बहुत प्रसन्न हुए, उन्होंने तुरंत सत्यवान को जीवित कर दिया और दोनों को सदा खुश रहने का आशीष देकर वहां से चले गए।

इसलिए होती है वट वृक्ष की पूजा

ये सबकुछ वटवृक्ष के नीचे हुआ था इसलिए वट सावित्री व्रत पर सावित्री -सत्यवान के साथ वट वृक्ष की पूजा की जाती है। आपको बता दें कि वट वृक्ष को ज्ञान और निर्वाण का प्रतीक माना जाता है तो वहीं पुराणों में लिखा है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही वास करते हैं, इसकी पूजा करने से इंसान को ज्ञान और सुख दोनों की ही प्राप्ति होती है।

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