Ujjain Mahakal: जिस मंदिर के बारे में पीएम मोदी ने कहा "काल की रेखाएं मिटा देते हैं महाकाल", जानें खास बातें
Ujjain Mahakal temple: PM Modi said "Mahakal erases the lines of time", know the specialty
Ujjain Mahakal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मध्यप्रदेश के पवित्र नगरी उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम उज्जैन के अति पवित्र महाकाल मंदिर के गृभग्रह में जाकर दर्शन किया इसके साथ ही वहां पर बैठकर कुछ मिनट तक मंत्रों का जाप भी किया। महाकाल की महिमा के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा महाकाल काल की रेखाएं मिटा देते हैं। पीएम मोदी ने जिस महाकाल मंदिर की पवित्र भूमि के बखान किया उसके बारे में आइए जानते हैं बहुत ही महत्वपूर्ण खास बातें......

महाकाल मंदिर की स्थापना द्वापर युग में हुई थी
भारत देश के सभी तीर्थों में महाकाल की नगरी श्रेष्ठ तीर्थ मानी जाती है। महाकाल मंदिर की स्थापना द्वापर युग में हुई थी। भगवान कृष्ण को पालने वाले पिता नंद जी की आठ पीढ़ी से पूर्व इसकी स्थापना हुई थी। पीएम मोदी ने जिस गर्भ ग्रह में जाकर ज्योर्तिलिंग की पूजा अर्चना की वो गोप नामक बालक द्वारा की गई थी।
नोट- सभी फोटो फेसबुक के Ujjain Mahakal Daily Darshan उज्जैन महाकाल दर्शन ग्रुप से ली गई हैं।

यहां भगवान कृष्ण शिक्षा ग्रहण करने आए थे
महाकवि कालिदास और तुलसीदास की रचनाओं में उज्जैन और महाकाल मंदिर का उल्लेख मिलता है। उज्जैन में भगवान कृष्ण शिक्षा ग्रहण करने आए थे। महाकाल की पूजा शिवलिंग के रुप में की जाती है।

क्यों हैं सभी तीर्थों में श्रेष्ठ
उज्जैन में स्थित महाकाल बाबा का ज्योर्तिलिंग भोले बाबा के सभी ज्योतिर्लिंगो में मुख्य है। जिसका पुराणों में मंत्रों में जिक्र मिलता है। पुराणों में लिखा है आकाशे तारकं लिंगं, पाताले हाटकेश्वरम्। मृत्युलोके च महाकलौं लिगत्रय नमोस्तुते। जिसका मतलब है जहां महाकाल स्थित है वही पृथ्वी का नाभि स्थान है । बताया जाता है, वही धरती का केंद्र है।

उज्जैन में विराजित हैं साढ़े तीन महाकाल
उज्जैन में साढ़े तीन महाकाल विराजमान हैं। जिसमें महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। मान्यता है उज्जैन जाने वालों को इन सभी के दर्शन करने चाहिए।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के तीन खंड हैं
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 3 खंडों में विभाजित है।
नीचे के खंड में महाकालेश्वर,
बीच यानी मध्य भाग में ओंकारेश्व
ऊपरी हिस्से में नागचन्द्रेश्र मंदिर विराजित हैं

कालो के काल महाकाल की भस्म से होता है श्रृंगार
कालो के काल महाकाल के दो अर्थ है एक काल का मतलब सयम, दूसरे का मतलबल मृत्यु। पहले पूरे विश्व का समय निर्धारित होता था इसलिए इस ज्योर्तिलिंग का नाम महाकालेश्वर रखा गया। मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले के सभी काल रूपी मुसीबत बाबा महाकाल हर लेते हैं। महाकाल में हर सुबह भस्त आरती होती है ये भस्म ताजा मुर्दे की होती है जिससे बाबा का श्रृंगार किया जाता है।

नंदी दीप है हमेशा प्रज्वलित रहता है
महाकाल मंदिर के गर्भग्रह में भगवान महाकालेश्वर की दक्षिणमुखी शिवलिंग विराजित है। इसी गर्भग्रह में नंदी दीप है जो हमेशा प्रज्वलित रहता है।












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