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Somnath Mandir: सोमनाथ को प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों माना जाता है? क्या है इसके पीछे का राज?

Somnath Mandir First Jyotirlinga Update News : पूरे देश में इस वक्त सोमनाथ मंदिर चर्चा का विषय बना हुआ है, वजह है 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व', जो कि सोमनाथ पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर मनाया जा रहा है।

आपको बता दें कि सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। सोमनाथ मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत के इतिहास, संघर्ष और पुनर्निर्माण की अद्भुत गाथा भी कहता है, इस मंदिर के इतिहास को समझने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर ज्योतिर्लिंग होते क्या हैं?

Somnath Mandir

ज्योतिर्लिंग क्या है?

'ज्योतिर्लिंग' दो शब्दों से मिलकर बना है- 'ज्योति' यानी प्रकाश और 'लिं'ग यानी प्रतीक अर्थात, ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का वह दिव्य स्वरूप है जिसमें वे अग्नि या प्रकाश के रूप में प्रकट हुए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तभी भगवान शिव एक अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योति) के रूप में प्रकट हुए। उस प्रकाश स्तंभ के आदि और अंत को न तो ब्रह्मा जान सके और न ही विष्णु। उसी दिव्य प्रकाश रूप को 'ज्योतिर्लिंग' कहा गया।

Somnath Mandir को प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों माना जाता है?

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को प्रथम यानी पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। इसके पीछे पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं।

प्राचीनतम ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। शास्त्रों और पुराणों में इसका सबसे पहले उल्लेख मिलता है, इसलिए इसे प्रथम ज्योतिर्लिंग कहा गया।

Somnath Mandir का शिवपुराण में प्रथम स्थान

शिवपुराण में जब 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन किया गया है, तो सबसे पहले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का नाम आता है। इसी क्रम के कारण भी सोमनाथ को प्रथम माना जाता है।

आस्था और पुनर्निर्माण का प्रतीक

इतिहास में सोमनाथ मंदिर कई बार नष्ट हुआ, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यह शिव भक्ति, आस्था और धर्म की विजय का प्रतीक बन गया, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।

ज्योतिर्लिंग कितने हैं?

शिवपुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग माने गए हैं, जिनके नाम निम्मलिखित हैं..

  • सोमनाथ - गुजरात
  • मल्लिकार्जुन - आंध्र प्रदेश
  • महाकालेश्वर - मध्य प्रदेश
  • ओंकारेश्वर - मध्य प्रदेश
  • केदारनाथ - उत्तराखंड
  • भीमाशंकर - महाराष्ट्र
  • काशी विश्वनाथ - उत्तर प्रदेश
  • त्र्यंबकेश्वर - महाराष्ट्र
  • वैद्यनाथ - झारखंड
  • नागेश्वर - गुजरात
  • रामेश्वरम - तमिलनाडु
  • घृष्णेश्वर - महाराष्ट्र

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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