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Shardiya Navratri Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है देवी के किस रूप की आराधना? जानिए पूजा विधि और कथा

Maa Kushmanda Puja Vidhi: नवरात्रि के 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। चौथा दिन मां कूष्माण्डा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर केवल अंधकार छाया था, तब देवी कूष्माण्डा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

ब्रह्मांड की रचयिता होने के कारण मां कूष्माण्डा को ब्रह्मांड की जननी और आदिशक्ति भी कहा जाता है। भक्त इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं। इससे जीवन में सेहत, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं मां कूष्माण्डा की पूजन सामग्री, पूजा विधि और कथा।

Maa Kushmanda

🌸 मां कूष्माण्डा पूजन सामग्री

  • कलश, गंगाजल, नारियल और आम्रपल्लव
  • मां कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र
  • लाल कपड़ा (आसन और वस्त्र हेतु)
  • अक्षत (चावल), रोली, हल्दी, सिंदूर
  • मौली (कच्चा सूत), पुष्पमाला और ताजे फूल
  • धूप, दीपक (घी/तेल) और अगरबत्ती
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन
  • फल (नारियल और मौसमी फल), मिठाई
  • पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, खजूर, मखाना)
  • नैवेद्य और भोग सामग्री (मालपुए, हलवा, कद्दू से बने पकवान)

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🪔 मां कूष्माण्डा की पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संकल्प लें।
  • लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पास में जल से भरा कलश रखें, उस पर स्वस्तिक बनाकर आम्रपल्लव और नारियल रखें।
  • मां को रोली, अक्षत, पुष्प, सिंदूर, सुपारी, पान, लौंग और इलायची अर्पित करें।
  • धूप और दीप जलाकर मां का ध्यान करें।
  • "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।
  • मां को मालपुए, हलवा और कद्दू से बने पकवानों का भोग लगाएं।
  • अंत में मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

📖 मां कूष्माण्डा की कथा

कथाओं के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, तब मां कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसलिए उन्हें आदिस्वरूपा और जगत की सृजनकर्ता माना जाता है। वे अष्टभुजा धारी हैं और उनका वाहन सिंह है। उनके हाथों में कमल, धनुष-बाण, अमृत कलश, चक्र, गदा और माला रहती है। मां की उपासना करने से रोग-शोक और भय दूर होते हैं तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।

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