Shani Pradosh Vrat 2024: शनि प्रदोष आज, जानिए पूजा विधि और कथा
Shani Pradosh Vrat 2024: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी पवित्रा द्वादशी, दामोदर द्वादशी, पवित्रा बारस के नाम से प्रसिद्ध है। इस बार यह द्वादशी 17 अगस्त 2024 शनिवार को आ रही है। इस दिन शनि प्रदोष का संयोग भी बन रहा है।
ऐसे शुभ योग में भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु का पूजन सर्वसिद्धिदायक और सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाला रहेगा। पवित्रा द्वादशी मुख्यत: वैष्णव संप्रदाय को मानने वाले लोग करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का पवित्रारोपण किया जाता है।

पवित्रा द्वादशी का पूजन करने का उद्देश्य यह होता है कि वर्षभर आपके द्वारा की गई पूजा आदि का शुभ फल प्राप्त हो और आगे आने वाले वर्षभर आपके द्वारा की गई पूजाओं, व्रतों आदि का फल भगवान विष्णु प्रदान करें। पवित्रा द्वादशी के दिन भगवान विष्णु को कपास के सूत से बना पवित्रक धारण करवाया जाता है।
कैसे की जाती है पवित्रा द्वादशी की पूजा
पवित्रा द्वादशी के दिन भगवान विष्णु और शिवजी के पूजन का विधान है। यह व्रत वैसे तो सभी लोग कर सकते हैं किंतु इसे अधिकतर वैष्णव संप्रदाय का अनुसरण करने वाले लोग ही करते हैं। इसमें भगवान विष्णु और शिवजी का विधिपूर्वक पूजन करें। भगवान को जो पवित्रक अर्पित किया जाता है उसके संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि सतयुग में मणिमय, त्रेता में स्वर्णमय, द्वापर में रेशम का और कलयुग में कपास के सूत का पवित्रक अर्पित करना चाहिए।
पवित्रक अर्पण करने की विधि
- अपने घर के पूजा स्थान में या घर के किसी साफ-स्वच्छ पवित्र स्थान में पूजन करना चाहिए।
- इसके लिए एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और शिवजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- चौकी पर एक कलश भी स्थापित करें।
- पवित्रकों को बांस की टोकरी में रखकर सुंदर वस्त्र से ढंककर भगवान के सम्मुख रख दें।
- भगवान से कहें कि हे प्रभु! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए कहता हूं, मेरे कार्य में कोई विघ्न न आए, आप ही मेरी परमगति हैं। मैं इस पवित्रक से आपको प्रसन्न करता हूं। हे देवेश! वर्ष पर्यन्त आप मेरी रक्षा करें और मेरी पूजा का श्रेष्ठ फल मुझे प्रदान करें।
- इसके बाद कलश में देवताओं का आव्हान करके बांस की टोकरी में रखे हुए पवित्रक की प्रार्थना करें।
- इसके बाद हाथ में अक्षत, पुष्प लेकर प्रार्थना करें कि हे भगवन मैं आपको पवित्रक धारण करवाता हूं। ऐसा कहकर भगवान विष्णु को पवित्रक धारण करवाएं।
- समस्त सामग्री से पूजन करें। धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- घृत सहित खीर का हवन करें।
- पूजन पूर्ण होने के बाद पवित्रक का विसर्जन करें।
शनि प्रदोष में करें शिवजी का पूजन
इस बार पवित्रा द्वादशी के दिन शनि प्रदोष का संयोग भी बना है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से करें। विधिवत पूजन करें। प्रदोष व्रत की कथा सुनें। शनि प्रदोष के पूजन से शिवजी प्रसन्न होते हैं और मनुष्य के अनेक कष्टों का निवारण सहज ही कर देते हैं। 17 अगस्त को प्रदोष काल का समय सायं 6:56 से रात्रि 9:10 बजे तक रहेगा।












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