Shani Pradosh Vrat 2021: शनि प्रदोष व्रत आज, जानिए क्या है शुभ-मुहूर्त?

नई दिल्ली, 04 सितंबर। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का काफी महत्व है और जब प्रदोष शनिवार को होता है तो इसे शनि प्रदोष कहते हैं, जिसका अपना खासा महत्व है। इस बार शनि प्रदोष व्रत आज अर्थात 4 सितंबर को है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की विशेष पूजा करनी चाहिए जिससे इस व्रत का फल दो गुना मिलता है। कहते हैं प्रदोष के दिन अगर भोलेनाथ की पूजा सच्चे मन से की जाए तो इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है और इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है।

जानिए क्या है शनि प्रदोष व्रत का शुभ-मुहूर्त

ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

  • त्रियोदशी तिथि का आरंभ- 4 सितंबर शनिवार सुबह 8:24 बजे
  • तिथि का समापन- 5 सितंबर रविवार 8:21 बजे

शिव को करें इन मंत्रों से प्रसन्न

  • ॐ साम्ब सदाशिवाय नम:।।
  • ॐ क्रीं नम: शिवाय क्रीं ॐ।।
  • ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
  • शिवाय नम: ।।
  • श्री शंकराय नम: ।।
  • श्री महेशवराय नम: ।।
  • श्री रुद्राय नम: ।।
  • ॐ पार्वतीपतये नम: ।।
  • ॐ ऐं नम: शिवाय।।

शनि देव को करें प्रसन्न

  • ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
  • ॐ शं शनैश्चराय नमः।
  • ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
  • छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
  • ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
  • छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
  • ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।

पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत सुबह से रखा जाता है।
  • पूजा प्रदोष व्रत की पूजा गोधूलि बेला में होती है।
  • लेकिन इस बार शनि प्रदोष व्रत है तो शनिदेव की पूजा सुबह ही कर लें।
  • पूजा करने से पहले सारे व्रती पुनः स्नान करे और स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को पोछा लगाकर शुद्ध कर ले।
  • इसके बाद पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें।
  • कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। कुश के आसन पर बैठ कर शिवजी की पूजा विधि-विधान से करें। ऊं नमः शिवाय मंत्र बोलते हुए शिवजी को जल अर्पित करें।
  • इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिवजी का ध्यान करें।
  • ध्यान के बाद, प्रदोष व्रत की कथा सुने अथवा पढ़ें।
  • कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार ऊं ह्रीं क्लीं नमः शिवाय स्वाहा मंत्र से आहुति दें।
  • शिवजी की आरती करें, प्रसाद बांटे।

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