Shab-e-Barat 2023: शब-ए-बारात यानी 'क्षमा की रात', जानें क्यों मनाया जाता है
Shab-e-Barat 2023:शब-ए-बारात यानी 'क्षमा की रात' होती है। इस पवित्र रात का पूरे साल मुस्लिम समाज के लोग इंतजार करते हैं। इस दिन को मनाने के पीछे क्या मान्यता है आइए जानते हैं?

Shab-e-Barat 2023: शब-ए-बारात इस्लाम की सबसे पवित्र रातों में से एक है और इसे दुनिया भर में इस्लाम धर्म के लोग मनाते हैं। इस्लामिक महीने शाबान की 15 तारीख को शब-ए-बारात (मध्य शाबान) मनाया जाता है। शब-ए-बारात को क्षमा की रात या प्रायश्चित के रूप में मनाया जाता है। फारसी शब्द 'शब' का अर्थ रात है और अरबी शब्द 'बरात' के मायने मुक्ति और क्षमा है।

7 मार्च की रात को मनाया जाएगा शब-ए-बारात
2013 में भारत में शब-ए-बारात 7 मार्च यानी मंगलवार की रात को मनाया जाएगा। शब-ए-बारात भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अजरबैजान और तुर्की सहित पूरे दक्षिण एशिया में खास तौर पर मनाया जाता है। साथ ही मध्य एशिया, जिसमें उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।
शब-ए-बारात की सही तारीख जानने के लिए करते हैं चंद्रमा का इंतजार
शब-ए-बारात को मनाने का इस्लाम में विशेष महत्व है क्योंकि शब-ए-बारात इस्लाम के सबसे पाख यानी पवित्र अवसरों में से एक है। हर साल भारत समेत दुनिया भर के मुसलमान धर्म के लोग इस पर्व के लिए विशेष तैयारी करते हैं। हर साल, भारत में शब-ए-बारात की सही तारीख जानने के लिए चंद्रमा को देखने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों की अलग है मान्यता
शब-ए-बारात की शुरूआत शिया मुसलमानों के बारहवें इमाम मुहम्मद अल-महदी के जन्म से मानी जा सकती है। शिया समुदाय में इस रात को उनके जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। वहीं सुन्नी मुस्लिम समुदाय इस पर्व को इसलिए मनाते है क्योंकि उनका मानना है कि इस दिन, खुदा ने नूह के सन्दूक को जलप्रलय से बचाया था, यही वजह है कि दुनिया भर के लोग इस दिन को मनाते हैं।
पापों से मुक्त होने का दिन
बहुत से लोग मानते हैं कि यह एक पवित्र रात है जब अल्लाह अधिक क्षमाशील और दयालुु है और सच्ची प्रार्थना उनके पापों को से मुक्त होने का अच्छा दिन है। इस पवित्र रात में दिवंगत और बीमार परिवार के सदस्यों के लिए दया की भीख मांगने के लिए किया जाता है, और लोग ये दुआ करते हैं कि आने वाले साल में अल्लाह उनकी किस्मत, उनके निर्वाह, और क्या वे हज करने में सक्षम बनाए।
कुछ लोग शब-ए-बारात पर रोजा रखते हैं
इसके अलावा स्थानीय रीति-रिवाजों के आधार पर शब-ए-बारात की अपनी परंपराएं हैं। इस दिन पड़ोसियों, रिश्तेदारों, परिवार के सदस्यों और गरीबों में हलवा, जर्दा और मिठाइयां बनाकर बांटते हैं। बहुत से लोग अपने प्रियजनों की कब्र पर जाकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। कुछ लोग शब-ए-बारात पर रोजा रखते हैं। इस पवित्र दिन मस्जिदों को सजाया जाता है। रात में मुस्लिम समाज के लोग 'ईशा की नमाज' के साथ अपनी प्रार्थना शुरू करते हैं और शब-ए-बारात के रोजा से पहले सहरी खाने से पहले अगले दिन तक प्रार्थना करते रहते हैं।












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