Sawan shivratri 2021: आज कीजिए ये खास उपाय, संवर जाएगा जीवन

नई दिल्ली, 06अगस्त। आज सावन महीने की शिवरात्रि है, आज का दिन बड़ा पावन है। कहा जाता है कि आज के दिन अगर हम कुछ उपाय करें तो जीवन में चल रही बहुत सारी समस्याओं का अंत हो जाता है।आज के दिन शिव-पार्वती की पूजा होती है। ये दोनों ही अपने भक्तों से बहुत प्रेम करते हैं। इसलिए आज के दिन अगर उनकी सच्चे मन से पूजा की जाए तो इंसान के सभी कष्टों का अंत हो जाता है। आज के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने की प्रथा है, अगर जल अर्पित करते हुए आप कुछ विशेष बातों का ध्यान रखें तो आप अपनी कुछ खास परेशानियों से हमेशा के लिए मुक्ति पा सकते हैं।

सावन की शिवरात्रि आज, कीजिए ये उपाय

सावन की शिवरात्रि आज, कीजिए ये उपाय

  • ज्ञान प्राप्ति के लिए करें ये उपाय: आप शिवलिंग पर गंगाजल मिले जल को अर्पित करें।
  • धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय: आप शिवलिंग पर दूध मिले जल को अर्पित करें।
  • जॉब प्राप्ति के लिए करें ये उपाय: आप शिवलिंग पर चीनी मिले जल को अर्पित करें।
  • तरक्की प्राप्ति के लिए करें ये उपाय: आप शिवलिंग पर दही मिले जल को अर्पित करें।
शिवलिंग पर जल अर्पित करते वक्त रखें ये ध्यान

शिवलिंग पर जल अर्पित करते वक्त रखें ये ध्यान

  • शादी के लिए करें ये उपाय: आप शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद मां पार्वती की मूर्ति या फोटो पर उनका सोलह श्रृंगार करें।
  • मनचाहा वर पाने के लिए: आप शिवलिंग पर जल अर्पित करें और दिन भर का उपवास करें।
  • सुखी वैवाहिक जीवन के लिए : पति-पत्नी शिवलिंग पर साथ में जल अर्पित करें।
शिवजी की आरती जरूर करें

शिवजी की आरती जरूर करें

शाम को शिवरात्रि की पूजा करने के बाद शिवजी की आरती जरूर करें, ऐसा करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

शिव जी की आरती

शिव जी की आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

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