Sawan Pradosh Vrat 2021 : आज है प्रदोष, बना है सर्वार्थसिद्धि और रवियोग
नई दिल्ली, 17 अगस्त। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार आता है लेकिन कभी-कभी इसके साथ कुछ दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन जाने से यह अति महत्वपूर्ण और सभी कार्यो में सिद्धि देने वाला बन जाता है। आज के प्रदोष व्रत के दिन अनेक शुभ योगों का संयोग बना है। भगवान शिव के प्रिय प्रदोष के दिन मां लक्ष्मी का प्रिय दिन शुक्रवार है, इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग भी बन रहे हैं।

साथ आयु योग भी है जो आयु के साथ यश और सम्मान में भी वृद्धि करने वाला है। रात्रि में सवार्थसिद्धि और रवियोग होने के कारण प्रदोष की रात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है। विशेषकर धन प्रदायक मामलों के लिए इसका बड़ा महत्व है।
आइए जानते हैं इस दिन क्या करें
- पहला प्रयोग : यदि आपके पास पैसों की तंगी बनी रहती है। दिनरात कड़ी दौड़-धूप करने के बाद भी मनमुताबिक कमाई नहीं हो पा रही है। इस प्रदोष के दिन व्रत रखें। प्रदोषकाल में शिवजी का अभिषेक शक्कर से करें। रात्रि में 10 बजे के बाद अपने घर के ईशान कोण को साफ-स्वच्छ करके एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर लक्ष्मी माता की मूर्ति या तस्वीर रखें। उस चौकी पर 21 गुलाब के पुष्प अर्पित करें और एक मुठ्ठी अक्षत के ऊपर प्रात: 4 बजे तक जलने वाला अखंड दीप प्रज्ज्वलित करें। प्रात:काल जब दीप पूर्ण हो जाए तो स्नान आदि से निवृत्त होकर दीपक के नीचे के अक्षत एक लाल कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी में रखें। कभी पैसों की कमी नहीं होगी। जो भी काम करेंगे उसमें लगातार तरक्की होती जाएगी।
- दूसरा प्रयोग : शुक्र प्रदोष के दिन प्रदोषकाल में शिवजी का अभिषेक करें। रात्रि में पीपल के पेड़ के नीचे आटे से बने 21 दीप प्रज्ज्वलित करें। दीपक में तिल का तेल भरें और उसमें कुछ दाने काले तिल के डालें।
- तीसरा प्रयोग : प्रदोष की रात्रि में जब सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग प्रारंभ हो अर्थात् रात्रि में 9.25 बजे के बाद किसी कुए, जलाशय, नदी, तालाब आदि के समीप जाएं और उसके समीप तीन दीप प्रज्ज्वलित करें। वहीं बैठकर ऊं महालक्ष्म्यै नम: मंत्र की 7 माला जाप करें। चुपचाप घर आ जाएं।
- चौथा प्रयोग : प्रदोष काल में शिवजी का विधिवत पूजन करके शिव तांडव स्तोत्र के 21 पाठ करें। अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होगी।












Click it and Unblock the Notifications