Sawan ki Shivratri: आज है शिवरात्रि, जानिए पूजाविधि और महत्व
Sawan ki Shivratri 2023: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की मासिक शिवरात्रि इस बार ध्रुव योग में आई है। आज के दिन व्रत रखकर शिवजी का पूजन करने से सांसारिक भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ध्रुव योग में आने के कारण इस शिवरात्रि पर पूजन का फल कभी नष्ट नहीं होगा। शिवरात्रि पूजन से दांपत्य के संकट भी दूर होते हैं।

शिवमहापुराण की कोटि रुद्रसंहिता के 38वें अध्याय में शिवरात्रि व्रत का महत्व और इसके लाभ का विस्तार से वर्णन किया गया है। पुराण के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और पार्वती ने शिवजी से पूछा था कि हे महादेव आप किस व्रत से संतुष्ट होकर भोग तथा मोक्ष प्रदान करते हैं।
व्रत सभी के लिए उत्तम धर्मसाधन
इस पर शिवजी ने कहा था- भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले मेरे अनेक व्रत हैं, प्रत्येक अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी और सोमवार ये मेरे प्रमुख व्रत हैं किंतु इन सबसे बड़ा और मेरा प्रिय व्रत है शिवरात्रि। उपरोक्त चारों व्रतों में शिवरात्रि व्रत विशेष बलवान होता है। भोग एवं मोक्ष की प्राप्ति की इच्छावालों को शिवरात्रि व्रत ही करना चाहिए। इस व्रत के अलावा मनुष्यों का हितकारक कोई दूसरा व्रत नहीं है। यह व्रत सभी के लिए उत्तम धर्मसाधन है।
व्रत विधि पूजन
शिवरात्रि के दिन किसी शिव मंदिर में या अपने घर में प्रात:काल स्नानादि के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर शुद्ध मन से शिवरात्रि व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का पूजन विविध द्रव्यों से करें। इसके बाद 108 बार ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए जलधारा से शिवजी का पूजन करें। इसदिन शिवजी को कमलपुष्प या कनेर के पुष्प अर्पित करना चाहिए।
शिव के आठ नामों से करें पूजन
शिवरात्रि के दिन शिवजी के आठ नामों का विशेष रूप से उच्चारण करना चाहिए। ये आठ नाम हैं- भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम एवं ईशान। इन नामों को श्री से युक्त करते अर्थात इनके प्रारंभ में श्री लगाकर शिवजी का पूजन करें। इससे धन-धान्य, भूमि, स्वर्ण, रत्न, हीरा आदि की प्राप्ति होती है।












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