Sawan 2023: यहां पर है विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग, हर साल बढ़ रहा है आकार
World's largest Shivling: सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ मंदिरों में जुटती है। भोले बाबा के भक्त सावन के महीने में दूर-दूर की तीर्थयात्रा के लिए जाते हैं। विश्व भर में भगवान शिव के कई सिद्ध और प्रसिद्ध मंदिर हैं, इन शिवालयों में विराजित शिव की अपनी अलग-अलग महिमा और विशेषता है।

विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग
वैसे तो आपने बहुत से मंदिरों में विशालकाय शिवलिंग के दर्शन किए होंगे लेकिन वो सभी कभी-कभी स्थापित किए गए होंगे। वहीं छत्तीसगढ़ में एक प्राकृतिक शिवलिंग है जो अपने आप प्रकट हुआ है और ये विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है।
घने जंगलों के बीच है ये मंदिर
छत्तीसगढ़ में ये मंदिर गरियाबाद जिले के मादौरा गांव के घने जंगलों में है। ये प्राकृतिक विशाल शिवलिंग भूतेश्वर नाथ के नाम से भी जाना जाता है। भूतेश्वरनाथ (या भूतेश्वरनाथ) (भूतेश्वरनाथ महादेव) को भकुर्रा महादेव (भकुर्रा महादेव) के नाम से भी जाना जाता है, वीकिपीडिया के अनुसार से ये केवल भारत का ही नहीं विश्व का सबसे विशाल प्राकृतिक शिवलिंग है।
हर साल बढ़ रहा है शिवलिंग का आकार
यहां की चमत्कारिक बात ये है कि इस शिवलिंग का आकार बढ़ता जा रहा है। यहां आने वाले भक्तों के अनुसार जंगल में स्थित ये शिवलिंग पहले आकार में छोटा था और अब ये पहले से बहत विशाल हो चुका है।
हर साल शिवलिंग का आकार मापा जाता है
ये ही कारण है कि हर साल राजस्व विभाग के अधिकारी यहां इसका आकार मापने के लिए आते हैं। ये शिवलिंग लगभग 18 फीट ऊंचा और 20 फीट गोलाई है। ये शिवलिंग प्रति वर्ष 6-8 इंच स्वयं बढ़ रहा है।
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में आते हैं कांवड़ भक्त
हर महाशिवरात्रि और सावन माह के सोमवार को लोग यहां पर महानदी का पवित्र जल, राजिम (कांवड़ यात्रा) लेकर यहां आते हैं । छत्तीसगढ़ के इस मंदिर को द्वादस ज्योतिर्लिंग की तरह अर्धनारीश्वर शिवलिंग रूप में मान्यता प्राप्त है।
इस शिवलिंग से जुड़ी है ये पौराणिक सच्ची कहानी
इस मंदिर के पीछे पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। सैकड़ों साल पहले जब जमींदारी प्रथा थी तब गरियाबंद के पारागांव की रहने वाली शोभा सिंह का यहां पर खेत था जब वो अपने खेत जाते थे तो उन्हें अपने खेत के पास बैल की आवाज, बैल की चिल्लाने की आवाज और शेर की दहाड़ सुनाई देती थी।
ये अवाज गांव वालों ने भी कई बार ये आवाज शाम को सुनी थी। जिसके बाद लोगों ने बैल और शेर की तलाश शुरू की लेकिन कोई जानवर तो नहीं मिला लेकिन इस टीले पर लोगों ने पूजा पाठ शुरू कर दी और भगवान का प्राकृतिक शिवलिंग लोग इसे मानने लगे।
इस बार सावन क्यों हैं बेहद खास
सावन के पवित्र महीना 4 जुलाई मंगलवार से शुरू हो चुका है। इस बार सावन का महीना बेहद खास है क्योंकि इस बार अधिकमास होने के कारण सावन के चार नहीं आठ सोमवार पड़ेगे। जानकारों के अनुसार 19 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है।












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