Sawan 2019: अगर चाहिए पिया का प्यार तो जरूर कीजिए मंगला-गौरी का व्रत

नई दिल्ली। श्रावण माह का हर दिन विशेष होता है। श्रावण माह में केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की पूजा का विशेष महत्व और दिन निश्चित होता है। जिस तरह प्रत्येक सोमवार को शिवजी की विशेष पूजा की जाती है, उसी प्रकार श्रावण माह में आने वाले प्रत्येक मंगलवार को मां पार्वती (मां गौरी) की पूजा करने का विधान है। श्रावण के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है। यह व्रत सुख, सौभाग्य प्रदायक होता है। यह व्रत महिलाएं करती हैं, लेकिन पूरे परिवार की शुभता के लिए इसे पति-पत्नी दोनों को जोड़े से करना चाहिए ताकि दोगुना फल प्राप्त हो सके।

क्या है मंगला गौरी व्रत

क्या है मंगला गौरी व्रत

श्रावण माह के प्रत्येक मंगलवार को मां गौरी की विशेष पूजा की जाती है। यह व्रत मंगलवार को करने के कारण इसे मंगला गौरी व्रत कहा जाता है। इस दिन मां गौरी की विधि विधान से पूजा कर उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट की जाती है। पूरा दिन व्रत रखते हुए मां गौरी की प्रतिमा को फलों और मिष्ठान्न् का नैवेद्य लगाकर 16 कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन करवाया जाता है या यथाशक्ति उन्हें उपहार भेंट किए जाते हैं।

कैसे करें मंगला गौरी व्रत

शास्त्रों के अनुसार श्रावण माह के प्रत्येक मंगलवार को प्रात: स्नान कर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उसपर स्थापित करें। आटे से 16 दीपक बनाए जाते हैं और उन्हें प्रज्जवलित करके देवी के सामने रखा जाता है। सोलह लड्डू, पान, फल, फूल, लौंग, इलायची और सुहाग की सामग्रियों (चुनरी, हल्दी, मेहंदी, काजल, कांच, कंघी आदि) को देवी को भेंट किया जाता है। पूजा करके मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। पूजा पूर्ण होने के बाद ये सभी वस्तुएं किसी सुहागिन ब्राह्मणी को भेंट करें। साथ ही गौरी प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस दिन यह अवश्य ध्यान रखें कि इस पूजा में उपयोग की जाने वाली सभी वस्तुएं सोलह की संख्या में होनी चाहिए। पांच वर्ष तक मंगला गौरी व्रत करने के बाद पांचवे वर्ष के श्रावण माह के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत कथा

मंगला गौरी व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक गांव में बहुत धनी व्यापारी रहता था। विवाह के कई वर्षों बाद बड़ी मन्न्तों से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। परंतु उस बच्चे को श्राप था कि 16 वर्ष की आयु में सर्प के काटने के कारण उसी मृत्यु हो जाएगी। संयोगवश व्यापारी के पुत्र का विवाह सोलह वर्ष से पूर्व मंगला गौरी का व्रत रखने वाली एक स्त्री की पुत्री से हुआ। व्रत के फलस्वरूप उसकी पुत्री के जीवन में कभी वैधव्य दुख नहीं आ सकता था। इस प्रकार व्यापारी के पुत्र से अकाल मृत्यु का साया हट गया तथा उसे दीर्घायु प्राप्त हुई।

व्रत के प्रभाव

  • मंगला गौरी व्रत सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है।
  • यदि किसी की जन्मकुंडली में विवाह से जुड़ी कोई बाधा है तो उसके विवाह में निश्चित रूप से देरी होती है या कोई न कोई बाधा आती रहती है। ऐसे में उन्हें मंगला गौरी व्रत जरूर करना चाहिए।
  • जिन दंपतियों का वैवाहिक जीवन ठीक नहीं चल रहा हो, उन्हें इस व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन की परेशानियां दूर हो जाती है। पति-पत्नी में आपसी प्रेम बढ़ता है।
  • जिन स्त्री-पुरुष के जीवनसाथी गंभीर रोगों से ग्रस्त हैं, उन्हें भी इस व्रत को करना चाहिए ताकि रोगों से छुटकारा मिल सके।
  • यह व्रत घर-परिवार में सुख-सौभाग्य प्रदान करता है।
  • कुंवारी कन्याएं यदि इस व्रत को करें तो उन्हें योग्य और मनचाहा वर प्राप्त होता है।
  • श्रावण में कब-कब मंगलवार

    श्रावण में कब-कब मंगलवार

    श्रावण का पहला मंगलवार 23 जुलाई को आ रहा है। इसके बाद 30 जुलाई को दूसरा मंगलवार आएगा। इसके बाद 6 और 13 अगस्त को तीसरा और चौथा मंगलवार आएगा।

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