Goddess Annapurna: जानिए कौन हैं 'मां अन्नपूर्णा' , क्या है उनका काशी से संबंध?
नई दिल्ली, 15 नवंबर। भारत से 100 साल पहले चोरी हुई 'मां अन्नपूर्णा' की मूर्ति को उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
आइए आपको बताते हैं 'मां अन्नपूर्णा' के बारे में कुछ खास बातें, जिनके आशीष से इंसान कभी भी भूखा नहीं रहता है।

- 'मां अन्नपूर्णा' का रूप काफी मोहक, सुंदर और सौम्य है।
- 'मां अन्नपूर्णा' मां दुर्गा का ही एक रूप हैं, जो कि अपने भक्तों से बहुत प्रेम करती हैं।
- 'मां अन्नपूर्णा' अन्न की देवी हैं, इन्हीं के आशीष से पूरे विश्व में भोजन का संचालन होता है।
- 'मां अन्नपूर्णा' ही 'मां शाकुम्भरी' भी है।
- 'मां अन्नपूर्णा' मां पार्वती के रूप में प्रभु शिव से शादी की थीं। तब शादी के बाद शिव ने कैलाश पर्वत पर रहने का फैसला किया था लेकिन हिमालय की पुत्री पार्वती को कैलाश यानी कि अपने मायके में रहना पसंद नहीं आया इसलिए उन्होंने काशी, जो कि भोलेनाथ की नगरी कही जाती है, वहां रहने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद शिव उन्हें यहां लेकर आ गए। इसलिए काशी ही मां अन्नपूर्णा की नगरी कही जाती है। इसलिए कहा जाता है भोलेनाथ की नगरी में कोई भी भूखा नहीं रहता है।
- काशी में ही 'मां अन्नपूर्णा' का सुंदर मंदिर हैं, जो कि अन्नकूट के दिन खुलता है और यहां उस दिन 56 तरह के भोग लगते हैं।
- स्कन्दपुराण के 'काशीखण्ड' में 'मां अन्नपूर्णा' के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है।
'मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने के लिए निम्मलिखित स्तुति करनी चाहिए।
शोषिणीसर्वपापानांमोचनी सकलापदाम्।दारिद्र्यदमनीनित्यंसुख-मोक्ष-प्रदायिनी॥
ये है अन्नपूर्णा मन्त्र
- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा।।'
- 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति अन्नपूर्णे नम:।।'
- 'ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य: सुतान्वित:।
- मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।'

भगवती अन्नपूर्णा स्तोत्र
- सिन्दूरा-ऽरुण-विग्रहां त्रिनयनां माणिक्य-मौलिस्फुरत्
- तारानायक-शेखरां स्मितमुखीमापीन-वक्षोरुहाम्।
- पाणिभ्यामलिपूर्ण-रत्नचषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीं
- सौम्यां रत्नघटस्थ-रक्तचरणां ध्यायेत् परामम्बिकाम्॥
- नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौंदर्यरत्नाकरी
- निर्धूताखिल-घोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी।
- प्रालेयाचल-वंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपुर्णेश्वरी॥1॥
- नानारत्न-विचित्र-भूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
- मुक्ताहार-विलम्बमान विलसद्वक्षोज-कुम्भान्तरी।
- काश्मीरा-ऽगुरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी।
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥2॥
- योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्माऽर्थनिष्ठाकरी
- चन्द्रार्कानल-भासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी।
- सर्वैश्वर्य-समस्त वांछितकरी काशीपुराधीश्वरी
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥3॥
- कैलासाचल-कन्दरालयकरी गौरी उमा शंकरी
- कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओंकारबीजाक्षरी।
- मोक्षद्वार-कपाट-पाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥4॥
- दृश्याऽदृश्य-प्रभूतवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
- लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपांकुरी।
- श्री विश्वेशमन प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥5॥
- उर्वी सर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी
- वेणीनील-समान-कुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी।
- सर्वानन्दकरी दृशां शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
- भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥6॥

'अन्नपूर्णा' की आरती
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम
- जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
- कहां उसे विश्राम ।
- अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
- लेत होत सब काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम
- प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
- कालान्तर तक नाम ।
- सुर सुरों की रचना करती,
- कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
- चारु चक्रधर श्याम ।
- चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
- शोभा लखहि ललाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम
- देवि देव! दयनीय दशा में,
- दया-दया तब नाम ।
- त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
- शरण रूप तब धाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
- श्री क्लीं कमला काम ।
- कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
- वर दे तू निष्काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- ॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥












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