Rath Saptami 2026: रथ सप्तमी आज, जानें पूजाविधि, मुहूर्त और सूर्यदेव की आरती
Rath Saptami 2026: माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित हैं। कहते हैं आज के दिन सूर्यदेव की पूजा करने से इंसान को यश और तरक्की की पाप्ति होती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्यदेव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर उत्तरायण की गति में अग्रसर हुए थे, इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है।

Rath Saptami 2026: आज पूजा का मुहूर्त
- 08: 34 AM से 9:56 AM ( पहला शुभ मुहूर्त)
- 9:57 AM से 11:17 AM ( दूसरा शुभ मुहूर्त)
- 12:17 PM से 01:01 AM (अभिजीत मुहूर्त)
- 02:00 PM से 03:22 AM ( चौथा शुभ मुहूर्त)
Rath Saptami 2026:पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्नान के समय सिर पर सात आक (मदार) के पत्ते रखें। उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव के अर्ध्य दें, तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और रोली डालें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सूर्याय नमः'का जाप करें। फिर 108 बार गायत्री मंत्र या सूर्य बीज मंत्र का जाप करें।गेहूं, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र और तिल का दान करें। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
Rath Saptami 2026: रथ सप्तमी का स्वास्थ्य लाभ
- सूर्य स्नान से विटामिन-D प्राप्त होता है।
- मानसिक तनाव में कमी आती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Rath Saptami 2026: सूर्यदेव की आरती
- ऊँ जय सूर्य भगवान,
- जय हो दिनकर भगवान ।
- जगत् के नेत्र स्वरूपा,
- तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
- धरत सब ही तव ध्यान,
- ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
- श्वेत कमलधारी ।
- तुम चार भुजाधारी ॥
- अश्व हैं सात तुम्हारे,
- कोटी किरण पसारे ।
- तुम हो देव महान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- ऊषाकाल में जब तुम,
- उदयाचल आते ।
- सब तब दर्शन पाते ॥
- फैलाते उजियारा,
- जागता तब जग सारा ।
- करे सब तब गुणगान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- संध्या में भुवनेश्वर,
- अस्ताचल जाते ।
- गोधन तब घर आते॥
- गोधुली बेला में,
- हर घर हर आंगन में ।
- हो तव महिमा गान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- देव दनुज नर नारी,
- ऋषि मुनिवर भजते ।
- आदित्य हृदय जपते ॥
- स्त्रोत ये मंगलकारी,
- इसकी है रचना न्यारी ।
- दे नव जीवनदान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- तुम हो त्रिकाल रचियता,
- तुम जग के आधार ।
- महिमा तब अपरम्पार ॥
- प्राणों का सिंचन करके,
- भक्तों को अपने देते ।
- बल बृद्धि और ज्ञान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- भूचर जल चर खेचर,
- सब के हो प्राण तुम्हीं ।
- सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
- वेद पुराण बखाने,
- धर्म सभी तुम्हें माने ।
- तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- पूजन करती दिशाएं,
- पूजे दश दिक्पाल ।
- तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
- ऋतुएं तुम्हारी दासी,
- तुम शाश्वत अविनाशी ।
- शुभकारी अंशुमान ॥
- ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
- ऊँ जय सूर्य भगवान,
- जय हो दिनकर भगवान ।
- जगत के नेत्र रूवरूपा,
- तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
- धरत सब ही तव ध्यान,
- ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें












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