Rama Ekadashi 2024 Chalisa:इस चालीसा बिना अधूरी है भगवान विष्णु की पूजा, जरूर करें आज, मिलेगी पापों से मुक्ति

Rama Ekadashi 2024 : कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की 'एकादशी' को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है, इसका बड़ा मान है। आज ये पावन दिन है। माना जाता है कि यह भक्तों को उनके पापों से मुक्त करता है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि राम एकादशी के दिन उपवास रखने से और विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के समस्त दुखों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Rama Ekadashi 2024 Chalis

आइए जानते हैं राम एकादशी की पूजा विधि और महत्व विस्तार से...

रमा एकादशी पूजा विधि (Rama Ekadashi 2024 Puja Vidhi)

  • रमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। मन में उपवास का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए आप पूरे दिन व्रत रखेंगे और सायंकाल को भगवान विष्णु की पूजा करेंगे।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल या पवित्र जल से स्नान कराएं।
  • फिर उन्हें वस्त्र, पुष्प, तुलसी दल और फल चढ़ाएं।
  • धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें।
  • पवित्र मंत्रों का उच्चारण करें और भगवान से कृपा की कामना करें।
  • इस दिन विष्णु चालीसा का पाठ विशेष लाभकारी माना जाता है।
  • इसके साथ ही, रामायण के कुछ भागों का पाठ करना भी पुण्यदायक माना गया है।
  • अगले दिन द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और भोजन का सेवन करें।

भगवान विष्णु चालीसा (Lord Vishnu Chalisa)

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।

चालीसा

  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।
  • पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।
  • देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
  • हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।
  • तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
  • गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।
  • हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
  • देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।
  • चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
  • जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।
  • शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
  • करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।
  • करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
  • सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।
  • दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
  • पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।
  • सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
  • निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+