Pavitra Ekadashi 2024: पवित्रा एकादशी के व्रत से मिलेगा वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य, मिलेगा संतान सुख
Pavitra Ekadashi 2024: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी पवित्रा एकादशी के नाम से विख्यात है। ये एकादशी आज शुक्रवार को आई है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
जो व्यक्ति शुद्ध अंत:करण से पवित्रा एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन करता है उसे वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।नि:संतान दंपती यदि इस एकादशी का व्रत करें तो उन्हें उत्तम गुणों वाली संस्कारवान संतान की प्राप्ति होती है।

इस एकादशी को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली कहा गया है। इसे पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है। इसलिए जिन दंपती के पुत्र या संतान गलत रास्ते पर चले गए हैं उन्हें सही मार्ग पर लाने के लिए यह एकादशी की जाती है।
पवित्रा एकादशी की पूजन विधि
पवित्रा एकादशी के दिन सूर्योदय पूर्व स्नानादि से निवृत होकर भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य अर्पित करें। उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल पुष्प और पैसा लेकर एकादशी व्रत का संकल्प लें। यदि किसी कार्य विशेष कामना की पूर्ति के लिए व्रत कर रहे हैं तो उसका भी उच्चारण करें।
एकादशी व्रत की कथा सुनें
इसके बाद समस्त द्रव्यों सहित पूजन करें। फलों-मिष्ठान्नों का नैवेद्य लगाएं। एकादशी व्रत की कथा सुनें। दिनभर निराहार रहें और सायंकाल के समय तुलसी माता के पौधे के समीप दीप प्रज्ज्वलित करें।
श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का पूजन भी करें
इस दिन भगवान विष्णु को सिंघाड़ा और सिंघाड़ा से बने पकवानों का नैवेद्य अर्पित करें और स्वयं भी फलाहार में सिंघाड़ा ही ग्रहण करें। दूसरे दिन व्रत का पारणा करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें। इस बार एकादशी के दिन शुक्रवार है इसलिए श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का पूजन भी करें।
एकादशी व्रत की कथा
प्राचीन काल में महिष्मति नगरी में महीजीत नामक राजा राज करता था। राजा धर्मात्मा, शांतिप्रिय तथा दानी होने के बाद भी नि:संतान था। एक बार राजा परमज्ञानी लोमेश ऋषि से संतान प्राप्ति का उपाय पूछने गए। ऋषि ने बताया कि राजन आपने पिछले जन्म में श्रावण की एकादशी को अपने तालाब से प्यासी गाय को पानी नहीं पीने दिया था। उसी के परिणामस्वरूप आप संतान सुख से वंचित हैं। आप श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नियमपूर्वक व्रत रखें। इससे अवश्य संतान की प्राप्ति होगी। ऋषि की बताई हुई विधि के अनुसार राजा और रानी ने व्रत किया और उन्हें उत्तम गुणों वाली संतान की प्राप्ति हुई।
एकादशी तिथि कब से कब तक
- एकादशी प्रारंभ 15 अगस्त प्रात: 10:26 से
- एकादशी पूर्ण 16 अगस्त प्रात: 9:39 तक
- व्रत का पारणा 17 अगस्त प्रात: 6:04 से 8:05 तक












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