कविता: मेरे देश के नव जवान , मेरे देश के नव जवान
कर रही मां भारती , निज वीरों का आह्वान ॥
मेरे देश के...........'
'है आज समय की मांग , पथ कर्म का शुभ नेक हो ।
तज ऊंच नीच जाति-पांत,अब धर्म सबका एक हो॥
है ईश सबका एक ही ,जिसकी हैं हम संतान
मेरे देश के...............'
'तज दो व्यसन तुम सभी ,जिससे श्रम कभी न व्यर्थ हो।
नित आश रखो पास की ,तुम स्वमं सभी समर्थ हो॥
लेना नही अब भूलकर भी,किसी का तुम एहसान
मेरे देश के......'
'कभी कर्म ऐसा न करो , जिससे मन को क्षोभ हो ।
तुम दूर उससे भी रहो ,जिससे जरा भी लोभ हो ॥
कर्म कर हासिल करो ,जिससे सीख ले जहान
मेरे देश के............'
'रहो सत्य पथ पर अग्रसर,मन से भी न अधर्म हो ।
तुम बात वह बोलो नही ,जिसका न मालुम मर्म हो ॥
कभी कर्म को त्यागकर , तुम करना नही प्रस्थान
मेरे देश के..........'
'है ख्वाहिश तुमसे यही ,और तुमपे यही विश्वास है ।
रहो संतुष्ट उसमें ही , जो भी तुम्हारे पास है
आवश्यक्तायें अनंत हैं,जिनकी पूर्ति नही आसान
मेरे देश के.........'
'लक्ष्य हमेशा याद रखो ,जिससे वह कभी न दूर हो ।
बढो निडर हो उत्साह से,तुम ही तो सच्चे शूर हो ॥
कर्मवीरों की मदद सदा , खुद करते हैं भगवान ।
मेरे देश के............'
'रखो आपस में मेल जोल , जिससे जीवन मे आनन्द हो ।
आगे बढ जन जाग्रति करो, जिससे सब कुप्रथायें बन्द हों ॥
मां भारती के लाल प्यारे , तुम रहना नहीं अन्जान ।
मेरे देश के.......'
'अब है समय वह आ गया ,मां को तेरी दरकार है ।
मन जीत लिया तो जीत प्यारे, मन हारे तो हार है ।।
दो रिपु को ललकार तुम,कर गर्जन सिन्ह समान ।
मेरे देश के .........'
'कर्तव्य पथ पर बढ्ते रहो ,क्षण भी कहीं रुकना नहीं ।
बाधा विघ्न आये कोई भी,हो विचलित कभी झुकना नही ॥
भूलो उनको न कभी तुम, जो मां पर हुए कुर्बान
मेरे देश के.............'
'मां भारती के लाल प्यारो , तुम सभी स्वछ्न्द हो ।
पर सत्य अहिंसा प्रेम के,तुम सभी पाबन्द हो ॥
'राजनारायण' कहे तुम पर,सदा मुदित हो भगवान।
मेरे देश के..............'













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