जानिए नवरात्रि में क्यों होता है दुर्गा मां का श्रृंगार?

बैंगलुरू। नवरात्रि में केवल मां का श्रृंगार ही मायने नहीं रखता है बल्कि मां की पूजा करने वाली भक्तजनों का भी संजना-संवरना काफी जरूरी है।

काशी के पंडित स्वामी नाथ शर्मा का कहना है कि मां का श्रृंगार हमलोग इसलिए करते हैं क्योंकि वो पावन हैं और सर्वशक्तिमान, मजबूत और सुंदर हैं, जिनकी छांव में इंसान हर दर्द भूल जाता है, जब बच्चों को ममता की जरूरत बनती हैं तो वो परमप्रिया मां पार्वती बन जाती हैं और जब बच्चों की जान पर बन आती हैं तो वो मां काली का रूप धर लेती हैं, इसलिए भक्तजन खुश होकर अपनी मां को सजाते हैं।

पंडित स्वामी नाथ शर्मा ने कहा किल मां का वास अपने हर भक्त के दिल में होता है इसलिए मां की तरह भक्त को भी संजना-संवरना चाहिए क्योंकि इस वजह से को खुश और शांत रहेगा जो कि किसी भी काम को करने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हैं। इसलिए दुर्गासप्तशति और पुराणों में मां के श्रृंगार का वर्णन होता है।

मालूम हो कि नवरात्र में कई जगहों पर मां को फूलों से तो कई जगह मोतियों और गहनों से सजाया जाता है, यही नहीं कहीं-कहीं तो लोग मां का श्रृंगार करते समय काफी नाचते-गाते भी हैं। मां की भक्ति का यह भी एक मोहक हिस्सा है। आईये डालते हैं एक नजर मां की झांकियों पर

जय मां दुर्गे

मां की सजावट।

गरबा

गरबा करते लोग।

मां की झांकी

मां की झांकी।

मां की झांकी

मां की झांकी।

मां की झांकी

मां की झांकी

मां की झांकी।

मां की झांकी

मां की झांकी

मां की झांकी।

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