Shardiya Navratri 2022: आज है 'महाअष्टमी', क्या है कन्या पूजन का मुहूर्त? क्या आज ही लगेगी नवमी?

Shardiya Navratri 2022: आज है 'महाअष्टमी', आज के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप यानी कि 'महागौरी' की पूजा होती है। महागौरी का रूप कापी सरस और मोहक है। मां अपने भक्तों से बहुत प्रेम करती हैं। कहते हैं कि मां पार्वती ने शिव जी को पति के रुप में पाने के लिए कई सालों तक घोर तपस्या की थी, जिससे उनका रंग काला पड़ गया था। उनके तप से खुश होकर जब शिवजी ने उन्हें गंगाजल के पवित्र जल से नहलाया था तो उनका वर्ण सोने के समान गौर हो गया था, इसलिए मां के आठवें रूप को 'महागौरी' कहते हैं।'

आज है 'महाअष्टमी'

आज है 'महाअष्टमी'

आज के दिन काफी लोग व्रत रहते हैं। जो लोग नौ दिन का उपवास है तो वो तो आज व्रत हैं ही लेकिन जो लोग दो दिन का व्रत करते हैं, वो प्रथम और अष्टमी को व्रत रहते हैं। आज के दिन घरों में कन्या पूजन कराया जाता है।

घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास

घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास

माना जाता है कि कन्या रूप में मां दुर्गा साक्षात रूप में घर में पधारती हैं, इसलिए नवरात्र में घरों में कन्या पूजन का रिवाज है। कहते हैं कन्या पूजन करने से इंसान के घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है और मां दुर्गा बहुत प्रसन्न होती हैं।

अष्टमी कन्यापूजन मुहूर्त

अष्टमी कन्यापूजन मुहूर्त

  • शुभ मुहूर्त - आज सुबह 09:12 बजे से सुबह 10:41 बजे तक।
  • बढ़िया मुहूर्त- आज दोपहर 03:07 बजे से शाम 04:36 बजे तक।
  • गोधूलि मुहूर्त - आज शाम 04:36 बजे से शाम 06:05 बजे।
कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्यापूजन कराते हैं

कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्यापूजन कराते हैं

कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्यापूजन कराते हैं तो उनके लिए आपको बता दें कि नवमी तिथि आज शाम 04 बजकर 37 मिनट पर प्रारंभ होगी और 04 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगी। इस दौरान लोग कन्यापूजन करा सकते हैं।

नवमी कन्यापूजन मुहूर्त

नवमी कन्यापूजन मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त - 11.52 PM - 12.39 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 05.58 PM - 06.22 PM
  • अमृत मुहूर्त - 04.52 PM - 06.22 PM
नौवें स्वरूप को सिद्धिदात्री कहते हैं

नौवें स्वरूप को सिद्धिदात्री कहते हैं

आपको बता दें कि मां दुर्गा के नौवें स्वरूप को सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है, नवमी के दिन इनकी पूजा होती है। मां दुर्गा के इस रूप को शतावरी और नारायणी भी कहा जाता है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी अराधना निम्लिखित मंत्रों से करनी चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

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