Bharat Tiwari Caste: ब्राम्हण या भूमिहार? किस जाति से थे भरत तिवारी, कास्ट के पीछे क्यों पागल हुआ सोशल मीडिया

Bharat Tiwari Caste Row: भोजपुर के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की चर्चा अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें लोग भरत तिवारी की जाति तलाशने में जुट गए हैं। कोई उन्हें ब्राह्मण बता रहा है तो कोई भूमिहार।

हैरानी की बात यह है कि एनकाउंटर की जांच और वीडियो फुटेज पर चर्चा करने की बजाय बड़ी संख्या में लोग कास्ट एंगल पर बहस कर रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसी मौत या पुलिस कार्रवाई के मामले में जाति इतनी बड़ी चर्चा का विषय क्यों बन जाती है?

Bharat Tiwari Caste Row

सोशल मीडिया पर अचानक भरत तिवारी कास्ट की एंट्री

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सर्च होने वाले सवालों में एक था- वह किस जाति से थे? फेसबुक, एक्स और व्हाट्सऐप पर अलग-अलग दावे किए जाने लगे। कई पोस्ट में बिना किसी आधिकारिक आधार के उन्हें अलग-अलग जातियों से जोड़ दिया गया। देखते ही देखते मामला पुलिस कार्रवाई से हटकर कास्ट डिबेट में बदल गया। इससे एक बार फिर यह सवाल सामने आया कि किसी भी बड़ी घटना के बाद सोशल मीडिया पर जाति की चर्चा इतनी तेजी से क्यों शुरू हो जाती है।

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किस जाति से था भरत तिवारी?

भरत भूषण तिवारी की जाति को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भरत तिवारी ब्राह्मण समुदाय से था। यही वजह है कि घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई ब्राह्मण नेता उसके गांव पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ब्राह्मण समाज से जुड़े कई संगठन भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं और इसे न्याय तथा सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।

भरत तिवारी एनकाउंटर में ब्राह्मण बनाम भूमिहार की बहस क्यों?

भरत तिवारी मामले में ब्राह्मण और भूमिहार की बहस इसलिए छिड़ी क्योंकि शाहाबाद क्षेत्र में तिवारी सरनेम सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं बल्कि कुछ भूमिहार परिवार भी इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोगों ने सरनेम के आधार पर अलग-अलग दावे शुरू कर दिए। हालांकि स्थानीय स्तर पर ज्यादातर लोग भरत को ब्राह्मण समुदाय का बता रहे हैं। इस बीच कई राजनीतिक दलों और जातीय संगठनों की एंट्री ने भी कास्ट एंगल को और हवा दे दी है। नतीजा यह हुआ कि एनकाउंटर से ज्यादा चर्चा उसकी जाति को लेकर होने लगी।

Bhojpur Encounter Caste में जांच से ज्यादा जाति पर फोकस क्यों?

एनकाउंटर मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो फुटेज, पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा जैसे मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सोशल मीडिया का एक बड़ा वर्ग इन सवालों की जगह जाति पर बहस करता दिखा। एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत में कई बार किसी घटना को लोग सामाजिक और राजनीतिक चश्मे से देखने लगते हैं। ऐसे में असली मुद्दा पीछे छूट जाता है और पहचान की राजनीति आगे आ जाती है।

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राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश?

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का दावा है कि अलग-अलग समूह इस मामले को अपने हिसाब से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग इसे जातीय उत्पीड़न का मामला बता रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष अलग नैरेटिव बना रहे हैं। यही वजह है कि भरत तिवारी की जाति को लेकर इतनी चर्चा हो रही है। हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों ने किसी भी तरह का जातीय एंगल सामने नहीं रखा है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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