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Navratri 2019: जन- जन को जीवनदान देती हैं 'मां शाकंभरी'

By पं.गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। देवीमाहात्म्य में देवीस्तुति नामक ग्यारहवें अध्याय में आदिशक्ति के जिन अवतारों का वर्णन मिलता है, उनमें सबसे अनूठा रूप है 'मां शाकंभरी' का। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट होता है, ये शाक-सब्जियों की देवी हैं। यह जानकारी आश्चर्यजनक प्रतीत हो सकती है और जिज्ञासा पैदा करती है कि असुरों के संहार करने के लिए जिनका प्राकट्य हुए, वे देवी शाक रूप में प्रकट क्यों हुईं? इसका सीधा सा उत्तर यह है कि देवी मातृस्वरूपा हैं और पूरा ब्रह्मांड ही उनकी संतान हैं।

देवी मां अपनी संतान को जब कष्ट में पाती हैं, तब वे उसकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयत्न करती हैं। यही कारण है कि जब मां ने अपनी संतानों को भूख से प्राण गंवाते देखा, तब वे उनकी रक्षा के लिए शाकंभरी अवतार में प्रकट हो गईं।

आइए, आज सुनते हैं मां के इस अद्भुत रूप की कहानी-

प्राचीन काल की बात है। एक बार पृथ्वी पर सूखा पड़ गया। यह सूखा भी कोई साधारण अकाल नहीं था। पूरे सौ वर्षों तक पृथ्वी पर वर्षा ही नहीं हुई। जन-जन में हाहाकार मच गया और खाने को अन्न का दाना तक शेष ना रहा। ऐसे में मृत्युलोक के सभी मुनियों ने मिलकर आदिशक्ति का स्तवन किया। ऋषियों और मनुष्यों की करूण पुकार सुनकर मां अयोनिजा रूप में प्रकट हुईं। इस अवतार में मां की सौ आंखें थीं।

अपनी सौ आंखों से मुनियों और जन-जन के कष्ट को देखा

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    उन्होंने अपनी सौ आंखों से मुनियों और जन-जन के कष्ट को देखा। इसीलिए उन्हें शताक्षी नाम से पुकारा गया। इसके बाद अपनी संतानों के कष्ट को दूर करने के लिए मां शाकंभरी रूप में प्रकट हुईं। अपने इस रूप में मां का स्वरूप विराट था। उनके पूरे शरीर पर नाना प्रकार की वनस्पति थी। ऐसा उल्लेख मिलता है कि इसके बाद जब तक वर्षा नहीं हुई, पूरे संसार ने मां शाकंभरी के शरीर पर उगी शाक-वनस्पति से ही अपने प्राण बचाए।

    मां शाकंभरी ने महादैत्य का वध किया

    इसी काल में असुर राज दुर्गम ने अपने अत्याचारों से पूरे संसार को थरथराकर रख दिया था। ऐसे में अपने भक्तों की पुकार पर मां शाकंभरी ने इस महादैत्य का भी वध किया। दुर्गम का वध करने के कारण ही इस अवतार में देवी शाकंभरी मां दुर्गा के भी नाम से जानी गईं। कालांतर में आदिशक्ति का यह दुर्गा अवतार ही अधिक प्रसिद्ध हो गया और शक्ति का पर्याय बन गया।

    सीख

    देवी के शाकंभरी रूप से स्पष्ट है कि बच्चों को जितना दुलार मां कर सकती है, उतना कोई नहीं कर सकता। अपने बच्चों के प्राणों की रक्षा के लिए एक माता हर तरह के प्रयास करती है और उन्हें बचाती भी हैं। देवी के इस ममतामयी रूप से प्रत्येक व्यक्ति को सीख लेना चाहिए कि वे सदैव अपनी माता के प्रति स्नेही बने रहें।

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    English summary
    In Hinduism, Shakambhari is an incarnation of Goddess Durga, consort to Shiva. She is the divine mother, called The Bearer of the Greens.
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