क्यों नवरात्रि में किया जाता हैं लाल-पीली चुनरी से मां का श्रृंगार?
इलाहाबाद के पंडित स्वामी नाथ शर्मा का कहना है कि मां का श्रृंगार हमलोग इसलिए करते हैं क्योंकि वो पावन हैं और सर्वशक्तिमान और सुंदर हैं।
इलाहाबाद। नवरात्रि में केवल मां का श्रृंगार ही मायने नहीं रखता है बल्कि मां की पूजा करने वाली भक्तजनों का भी संजना-संवरना काफी जरूरी है।
इलाहाबाद के पंडित स्वामी नाथ शर्मा का कहना है कि मां का श्रृंगार हमलोग इसलिए करते हैं क्योंकि वो पावन हैं और सर्वशक्तिमान और सुंदर हैं।

हर दर्द भूल जाता है...
जिनकी छांव में इंसान हर दर्द भूल जाता है, जब बच्चों को ममता की जरूरत बनती हैं तो वो परमप्रिया मां पार्वती बन जाती हैं और जब बच्चों की जान पर बन आती हैं तो वो मां काली का रूप धर लेती हैं, इसलिए भक्तजन खुश होकर अपनी मां को सजाते हैं।

भक्त के दिल में...
पंडित स्वामी नाथ शर्मा ने कहा किल मां का वास अपने हर भक्त के दिल में होता है इसलिए मां की तरह भक्त को भी संजना-संवरना चाहिए क्योंकि इस वजह से को खुश और शांत रहेगा जो कि किसी भी काम को करने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हैं। इसलिए दुर्गासप्तशति और पुराणों में मां के श्रृंगार का वर्णन होता है।

मोतियों और गहनों से सजाया जाता है...
मालूम हो कि नवरात्र में कई जगहों पर मां को फूलों से तो कई जगह मोतियों और गहनों से सजाया जाता है, यही नहीं कहीं-कहीं तो लोग मां का श्रृंगार करते समय काफी नाचते-गाते भी हैं। मां की भक्ति का यह भी एक मोहक हिस्सा है।

लाल-पीला वस्त्र
माना जाता है कि माता को लाल और पीला रंग बहुत पसंद हैं और वो इन रंग के कपड़ों को पहनती हैं इसी कारण इन रंगो के कपड़ों का प्रयोग हर शुभ काम में किया जाता है। इसलिए मां को प्रसन्न करने के लिए हर जातक अपनी हर संभव कोशिश करता है।

आखिर मां दुर्गा क्यों कहलाती हैं शेरावाली माता?
मां दुर्गा का वाहन शेर है, क्या कभी आपने सोचा है कि शक्ति की पर्याय मां भगवती की सवारी शेर ही क्यों है?












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