Naraka Chathurdasi Date: कब है नरक चतुर्दशी? क्या है मुहूर्त?
छोटी दिवाली का खास महत्व है। इस दिन 6 देवी देवताओं- श्रीकृष्ण, मां काली, यमदेव, हनुमान जी, शिवजी और गणेश जी की पूजा होती है।
नरक चतुर्दशी मुहूर्त: दीपों और रोशनी का त्योहार दीपावली यानी की दिवाली पांच दिनों का त्योहार होता है। जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और ये पर्व भईया दूज पर खत्म होता है। इस बार दिवाली की तिथियों को लेकर लोगों के अंदर थोड़ा कन्फ्यूजन हो गया है लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि छोटी दिवाली यानी कि नरक चतुर्दशी कब है? तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस बार धनतेरस 23 अक्टूबर है लेकिन इस दिन शाम 6 बजकर 3 मिनट से चतुर्दशी लग जाएगी इसलिए लोगो को थोड़ा भ्रम हो गया है, इसलिए जो लोग चतुर्दशी की पूजा शाम को करना चाहें वो इसी दिन कर सकते हैं, ये गलत नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर चतुर्दशी 24 अक्टूबर, शाम 5 बजकर 27 मिनट तक रहेगी और उदया तिथि 24 अक्टूबर को ही है इसलिए नरक चतुर्दशी सोमवार को ही है।

ये है नरक चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त
- नरक चतुर्दशी प्रारंभ - 23 अक्टूबर 2022 शाम 0 6. 03 मिनट पर
- नरक चतुर्दशी समापन -24 अक्टूबर शाम 05: 27 मिनट पर
- काली चौदस पूजा: 23 अक्टूबर को रात 11:42 PM से 24 अक्टूबर से 12:33 AM
- नरक चतुर्दशी उदया तिथि 24 अक्टूबर को है।
आपको बता दें कि छोटी दिवाली का खास महत्व है। इस दिन 6 देवी देवताओं- श्रीकृष्ण, मां काली, यमदेव, हनुमान जी, शिवजी और गणेश जी की पूजा होती है। माना जाता है कि इन सभी की पूजा करने से इंसान को हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है और उसे सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन लोग अपने घर के द्वार पर तेल का दीपक का जलाते हैं। इन 6 देवताओं की पूजा इन मंत्रों से करनी चाहिए।

गणेश जी को करें इन मंत्रों से प्रसन्न
- ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।
- ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
- ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
- ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।।
भगवान कृष्ण को करें इन मंत्रों से प्रसन्न
- 'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।।
- प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।
- ' 'ॐ नमः भगवते वासुदेवाय कृष्णाय क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।'
- 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे।'

मां काली को करें इन मंत्रों से प्रसन्न
- "आं हीं क्रां भद्र काल्यैय नमः"
- ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली,
- चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई, अब बोलो काली की दुहाई।
यमदेव के लिए मंत्र
- यमाय नम: यमम् तर्पयामि।
- यमाय धर्मराजाय मृत्ये चांतकाय च, वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च।
- औदुम्बराय दध्राय नीलीय परमिष्ठिने, व्रकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नम:।।
बजरंगबली के लिए मंत्र
- हं हनुमंते नम:।
- नासे रोग हरैं सब पीरा।
- जो सुमिरै हनुमत बल बीरा॥
- श्री हनुमंते नम:।
शिव जी के लिए मंत्र
- ओम साधो जातये नम:।।
- ओम वाम देवाय नम:।।
- ओम अघोराय नम:।।
- ओम तत्पुरूषाय नम:।।
- ओम ईशानाय नम:।।
- ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
कार्तिके जी के लिए मंत्र
- 'देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव।
- कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥'
- ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।












Click it and Unblock the Notifications